रहमत फायकी की पुण्यतिथि पर हुई काव्य गोष्ठी  

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रहमत फायकी की पुण्यतिथि पर हुई काव्य गोष्ठी

फोटो 17

अनोखा तीर, हरदा। म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई हरदा की मासिक काव्य गोष्ठी रहमत फायकी की पुण्यतिथि पर किसान भवन में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.प्रभुशंकर शुक्ल तथा विशिष्ट अतिथि अनन्य साहित्यप्रेमी एवं समाजसेवी अशोक नेगी उपस्थित थे। गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष जीआर गौर द्वारा की गई। गोष्ठी में संघ के सदस्यों द्वारा अपनी श्रेष्ठ रचनाओं के माध्यम से मरहूम शायर को स्मरणांजलि समर्पित की गई। इस अवसर पर सरस्वती वंदना सुभाष सिटोके द्वारा की गई। श्री नरेन्द्र वर्मा द्वारा ने अपनी रचना में बाधाओं से लड़ते-लड़ते जीवन-पथ पर बढ़ते जाओ उम्मीदों के आसमान पर एक नया सूरज चमकाओ, त्रिलोक शर्मा ने न्यौता था कंगन का हमको बिंदिया ने भी ललचाया-जननी के बहते आंंसू के आगे कुछ भी रास न आया। मंसूर अली मंसूर ने परचमे हिन्द जाके लहराया चॉंद वरना हमारा नहीं होता खुद से बातें किया करो मंसूर कभी इसमें खसारा नहीं होता। बृजमोहन अग्रवाल ने कमाते हो जो कुछ जताना नहीं कभी अपनी तनखा बताना नहीं। जयकृष्ण चांडक द्वारा- गुनगुनाएंगे फिर से अयोध्या चलो गीत गाएंगे फिर से अयोध्या चलो, बाद सदियों के अपने नये घर में अब राम आयेंगे फिर से अयोध्या चलो। बालमुकुंद ओझा ने जिंदगी और मौत के बीच लगाती है दौड़ उमरिया। रतन सिंह सोलंकी ने कमल पुष्प-से खिले खिले-से घन सावन-से हैं कजरारे मादक मारक जीवनदायक अति सम्मोहक नयन तुम्हारे। तारिक रहमत ने हम मुसाफिर हैं यहॉं पर अर्श के साए तले राह में कुछ देर ठहरे और फिर उठकर चले। सावन सिटोके ने नेह पिता का भिगो रहा बन पावस शुष्क महीने में/ लोमेश गौर ने साधारण-सा जीवन जीते साधारण-सा रहते हैं दुनिया भर की सारी बातें सुनकर सब कुछ सहते हैं न जाने किस मिट्टी से भगवान बनाते पापाजी सबका बोझ उठाने वाले को पापाजी कहते हैं। सुभाष सिटोके ने सोने जैसा मन था जिनका अब वो लोग कहां। शिरीष अग्रवाल ने कभी रूख करता हूं काशी का कभी काबा घूम आता हूं, एक सूरत नूरानी इधर भी है एक सूरत नूरानी उधर भी है। डॉ. प्रभुशंकर शुक्ल ने पीड़ाओं का जहर पिया इतना सारा तन घनश्याम हो गया। गोष्ठी के अंत में अशोक नेगी ने कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा कर सभी साहित्यकारों को साधुवाद व शुभकामनाए दी। मरहूम शायर जनाब रहमत फायकी के सुपुत्र शायर तारिक रहमत ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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