अनोखा तीर, खिरकिया। अखिल भा. सा. जैन संघ के अंतर्गत समता प्रचार संघ के माध्यम से रतलाम से खिरकिया समता भवन पहुंचे वरिष्ठ स्वाध्यायी पंकज कटारिया ने फाल्गुनी चातुर्मास के अंतिम दिवस पर कहा कि सभी माता-पिता को अपने बच्चों में जिन शासन के संस्कारों का बीजारोपण करना चाहिए। संस्कार समता संस्कार पाठशाला से ही प्राप्त होते हैं। स्कूल से सांसारिक ज्ञान मिलता है, जबकि पाठशाला से धार्मिक ज्ञान प्राप्त होता है। संस्कारों से दान की भावना विकसित होती है। संस्कारों का बीजारोपण करना और उन्हें विकसित करना अत्यंत दुष्कर कार्य है। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता अपने बच्चों में सुसंस्कारों का बीजारोपण नहीं कर पाते, वे माता बेरी के समान और पिता शत्रु के समान होते हैं। बच्चों में संस्कार धीरे-धीरे विकसित होते हैं तथा संस्कारवान बनने में मिथ्यात्व सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न करता है। इस अवसर पर सुमित मुणत ने कहा कि मनुष्य को गुणग्राही बनना चाहिए। उसे अपने दोषों को देखना चाहिए और दूसरों के गुणों को ग्रहण करना चाहिए। मौन रहकर अनर्थदंड से बचा जा सकता है। स्वाध्यायी अक्षय बाफना ने प्रतिदिन उत्साह और ऊर्जा के साथ प्रतिक्रमण करवाया। तीनों स्वाध्यायियों ने प्रतिदिन धार्मिक ज्ञानार्जन के माध्यम से सभी में धर्म के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न की। अंतिम दिवस पर समता दीप के समक्ष श्री श्वेतांबर जैन श्री संघ के सदस्यों और गुरु भक्तों द्वारा तीनों स्वाध्यायी बंधुओं का तिलक लगाकर आत्मीय सम्मान और अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धाशील गुरु भक्तों एवं समाज के श्रावक-श्राविकाओं के साथ ही इंदौर, कालधड़, कुंभराज और देवास आदि स्थानों से आए गुरु भक्त तथा श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
बच्चों में सुसंस्कारों का बीजारोपण करना चाहिए : पंकज कटारिया

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