अवैध कॉलोनाइजेशन पर सख्त रुख

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-उपाध्यक्ष सचिन बुचा ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
अनोखा तीर, सिराली। नगर परिषद सिराली के उपाध्यक्ष सचिन (श्याम) बुचा ने नगर क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध कॉलोनाइजेशन, शासकीय भूमि पर अवैध पट्टों के वितरण एवं अतिक्रमण को लेकर कलेक्टर हरदा को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उपाध्यक्ष सचिन बुचा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि नगर परिषद क्षेत्र के चारूवा रोड, खुदिया रोड, घोघडा रोड एवं हरदा रोड पर स्थित कृषि भूमि का बिना विधिवत डायवर्सन, बिना सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत लेआउट तथा बिना मूलभूत सुविधाओं के अवैध प्लॉटों के रूप में क्रय-विक्रय किया जा रहा है। उन्होंने इसे कानून का उल्लंघन बताते हुए आम नागरिकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
प्रशासनिक शिथिलता पर उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित मामलों की जानकारी स्थानीय राजस्व अधिकारियों को होने के बावजूद प्रभावी रोकथाम की कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे प्रशासनिक शिथिलता अथवा संभावित मिलीभगत की आशंका उत्पन्न हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सीमांकन कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है और अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है, जिससे जनविश्वास प्रभावित हो रहा है।
शासकीय भूमि पर अवैध पट्टों का मामला
उपाध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया है कि कुछ स्थानों पर शासकीय भूमि के अवैध पट्टे जारी किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है, जबकि वर्षों से आबादी क्षेत्र में निवासरत पात्र व्यक्तियों के पट्टा आवेदन लंबित पड़े हैं। इससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है और वास्तविक हितग्राहियों के साथ अन्याय हो रहा है।
कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप
उपाध्यक्ष ने अपने पत्र में कई विधिक प्रावधानों के उल्लंघन की बात कही है। इसमें मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत कृषि भूमि का गैर कृषि प्रयोजन हेतु बिना अनुमति उपयोग प्रतिबंधित बताया गया है। मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र में कॉलोनी विकास के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। वहीं मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के तहत बिना अनुमोदित लेआउट भूमि विभाजन दंडनीय है। साथ ही रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 के प्रावधान भी आवश्यकतानुसार लागू हो सकते हैं।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रों में सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल एवं विद्युत जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और न ही किसी प्रकार की वैधानिक स्वीकृतियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई हैं। ऐसी स्थिति में प्लॉट खरीदने वाले नागरिक भविष्य में आर्थिक नुकसान और कानूनी जटिलताओं में फंस सकते हैं।
उच्च स्तर पर जाने की चेतावनी
उपाध्यक्ष सचिन (श्याम) बुचा ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी अन्य राजस्व अधिकारी या संयुक्त जांच टीम से कराई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनहित में मामला संभाग आयुक्त, लोकायुक्त अथवा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने प्रशासन से जनहित में त्वरित हस्तक्षेप करते हुए अवैध कॉलोनाइजेशन पर रोक लगाने, शासकीय भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पात्र हितग्राहियों को न्याय दिलाने की मांग की है।

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