मुंबई से हरदा पहुंचा मैनेजमेंट दल …औद्योगिक प्रयास एवं जैविक खेती को समझा

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जिले में औधोगिक प्रयास तथा उसकी संभावनाओं को करीब से समझने के साथ साथ यहां जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में गतिशील कार्यो को देखने के लिये मुंबई से मैनेजमेंट दल हरदा पहुंचा है। दल में 42 अध्ययनरत छात्र तथा 4 प्रोफसर शामिल हैं। पहले दिन दल ने विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया।

 

अनोखा तीर, हरदा नर्मदा वैली रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन ट्रस्ट एवं डॉ. सीवी रामन विश्वविद्यालय खंडवा के सहयोग से मुंबई का 46 सदस्यीय मैनेजमेंट दल हरदा पहुंचा है। जिसमें ४६ अध्ययनरत छात्र एवं 4 प्रोफेसर शामिल हैं। मैनेजमेंट दल यहां औधोगिक प्रयास तथा उसकी संभावनाओं को करीब से समझने के साथ साथ यहां जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में गतिशील कार्यो को देखने के लिए पहुंचा है। पहले दिन डंगावाशंकर रोड स्थित फार्म हाउस पर कार्यक्रम हुआ। जहां उन्नतशील कृषकों के साथ ही उधोग जगत से जुड़े लोग शामिल रहे। इस मौके पर विशेषज्ञों ने कार्बन क्रेडिट और उसकी आय के स्त्रोत के साझा किया। वहीं शरद भायरे एवं पीएन सिरोठिया ने बांस उत्पादन एवं जैविक खाद के साथ जलवायु परिवर्तन पर अपनी बात रखी। आरएन दुगाया ने बांस के संपूर्ण जीवनकाल से उसकी विभिन्न उपयोगिताओं पर प्रकाश डाला। साथ ही ऐसे स्थान जहां बांस की खेती फायदेमंद है, उस पर फोकस किया। जैसे नदी-नालों के किनारे तथा मेढ़ पर बांस रोपण का महत्व समझाया गया।

प्रेक्टिकल सूझबूझ जरूरी

 उद्योगपति नटवर पटेल ने कहा कि बेशकीमती लकड़ी की कीमत पेड़ की उम्र से तय होती है। उन्होंनें उद्योग के क्षेत्र में प्रेक्टिकल पर जोर देकर कहा कि प्लाई में उपयोग आने वाली मशीनों को इस्तेमाल करने का अनुभव रखे।

आयुर्वेद का विशेष महत्व

इसी क्रम में श्री सर्वेश्वरी आयुर्वेद शाला से डॉ अशोक अयोध्यावासी ने आयुर्वेद से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य रखे। कहा कि मानव का शरीर पांच तत्वों से बना है और दवाई भी पांच तत्वों से बनती है, बस यही आयुर्वेद है।

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