सैकड़ों जरूरी काम छोड़कर पहले स्नान करो : राजेंद्रानंद महाराज

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प्रशांत शर्मा, हरदा। जहां प्रतिदिन हरिकथा होती है वहां सब मंगल होता है। ऐसी जगह पर श्रद्धा से जाओ और मर्यादा व शांति से भगवान की कथा सुनो। आप सैकड़ों काम छोड़ दो और पहले स्नान करो। केवल स्नान जल का ही नहीं होता है, जल स्नान हो गया हो तो जप स्नानम और जप स्नानम हो गया हो तो तप स्नानम और तप स्नानम हो गया हो तो इंद्रीयनिक्रेस्नानम और इसके बाद दया स्नानम। ऐसा शास्त्र कहते हैं कि पहले जल से स्नान करो और बाद के भी स्नान जरूरी है। यह बातें रेवापुर गांव में बेनीवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन हरिद्वार से आए प्रसिद्ध कथावाचक राजेंद्रानंद महाराज ने कही। जिन्होंने यह सब स्नान कर लिए उसके जीवन में सब ठीक होता है। जब भगवान सूर्य के दर्शन करो तो उसके पहले स्नान कर लो। एक दानव स्नान होता है जो दोपहर के दो बजे होता है। इसलिए हमें सूर्योदय के पहले स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के दौरान सबसे पहले अपने पैरों को धोओ। यह सोचो कि मैं तो अपने प्रभु श्रीहरि के चरणों को धो रहा है। विज्ञान भी यही कहता है और शास्त्र भी कि पहले अपने पैरों को धोओ। इसके बाद लोटे में जल लो और अपने माथे पर डालो। यह सोचो कि मैं भगवान शिव को स्नान करा रहा हूं। इसके बाद बह्माजी को और फिर पूरे शरीर को स्नान कराओ। समस्त देवी-देवता मरे शरीर में बसे हैं और मैं सभी को स्नान करा रहा हूं। इस तरह सोचकर खुद को स्नान कराओ। स्नान करते रहो और श्रीहरि का स्मरण करते रहो। आप देखना कुछ समय के बाद आपको ऐसा लगेगा कि आपने खुद स्नान करते हुए सभी देवी-देवताओं को स्नान करा दिया हो और उनकी भक्ति कर ली हो। यात्रा पर जाओ तो भगवान को प्रमाण करो आप जब भी किसी यात्रा पर जा रहे हों तो आप अपने भगवान को प्रणाम करके जाओ। जब कभी आधी रात को भी लौटना पड़े तो अपने भगवान को दूर से ही प्रणाम कर लेना। कहना कि हे प्रभु, हे माता मेरी यात्रा मंगलमय हुई। आप यह तीस दिन करके देखना आपकी भक्ति भी बढ़ेगी और सभी काम मंगलमय होंगे। आयोजक हरिशंकर बेनीवाल ने बताया कि 26 दिसंबर को पुर्णाहूति और प्रसादी वितरण के साथ कथा का समापन किया जाएगा।

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