Skip to content
Saturday, 17 October 2026
हरदा

रमन रोमांच शिविर के चतुर्थ दिवस…

3 min read
Text Size:

-बच्चों ने सीखी आत्मरक्षा, वैदिक गणित और रचनात्मकता की नई विधाएँ

अनोखा तीर, हरदा। मिशन हैप्पी हरदा के अंतर्गत बच्चों के सर्वांगीण विकास, व्यक्तित्व निर्माण, मानसिक क्षमता में वृद्धि, आत्मरक्षा कौशल तथा रचनात्मक गुणों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन व्यक्तित्व विकास शिविर रमन रोमांच का चतुर्थ दिवस उत्साह, उमंग एवं नई ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके पश्चात बच्चों ने विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया। शिविर के प्रथम सत्र में आत्मरक्षा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें खेल प्रशिक्षक राजेश बिलिया ने बच्चों को शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं आत्मरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कराते एवं अन्य शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते हुए आत्मरक्षा के नए कौशल सीखे। इस प्रशिक्षण से बच्चों में आत्मविश्वास और सजगता की भावना का विकास हुआ। इसके पश्चात सुश्री नेहा बाफना द्वारा वैदिक गणित सत्र बच्चों के लिए अत्यंत रोचक एवं उपयोगी साबित हुआ उन्होंने इस सत्र में बच्चों को सरल एवं रोचक विधियों से तीव्र गति से गणना करने के तरीके सिखाए गए। इन तकनीकों ने बच्चों की एकाग्रता, तर्कशक्ति एवं मानसिक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चों ने खेल-खेल में गणना की नई विधियाँ सीखते हुए अपनी बौद्धिक क्षमता का विकास किया। शिविर में सुश्री स्वाति मुकाती द्वारा चित्रकला प्रशिक्षण, मनोरंजक खेल एवं प्रेरणादायक कहानियों का आयोजन किया गया। इस सत्र ने बच्चों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि उनके भीतर रचनात्मक सोच और कल्पनाशक्ति को भी प्रोत्साहित किया। चतुर्थ दिवस का प्रमुख आकर्षण आर्ट एवं क्राफ्ट गतिविधि रही प्रशिक्षक पवन मोरछले ने बच्चों को पेपर फोल्डिंग, सजावटी आकृतियां बनाना तथा रंगीन कागज़ों से विभिन्न रचनात्मक वस्तुएँ तैयार करना सिखाया गया। बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और कल्पनाशक्ति का शानदार प्रदर्शन करते हुए सुंदर एवं आकर्षक क्राफ्ट तैयार किए। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों में धैर्य, सूक्ष्म कार्य करने की क्षमता, रचनात्मक सोच तथा नवीन प्रयोग करने की भावना विकसित होती दिखाई दी। प्रशिक्षकों ने बच्चों को कई नई रचनात्मक तकनीकों से परिचित कराया, जिन्हें बच्चों ने बड़े उत्साह एवं आनंद के साथ सीखा। शिविर में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र उपाध्याय ने बच्चों को प्रभावी लेखन, सुंदर अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के साथ अपने विचार प्रस्तुत करने के महत्वपूर्ण गुर सिखाए। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे लेखन के माध्यम से अपनी कल्पनाओं, भावनाओं और विचारों को सशक्त रूप से व्यक्त करें। उनके मार्गदर्शन में बच्चों ने रचनात्मक लेखन का अभ्यास कर अपनी भाषा एवं अभिव्यक्ति कौशल को बेहतर बनाने का प्रयास किया। शिविर की संयोजक सुश्री मीरा शर्मा ने बताया कि 22 मई को बच्चों को कराते के साथ-साथ कलागृह की संयोजक सुश्री सुलेखा गुर्जर द्वारा चित्रकारी के विशेष गुण सिखाए जाएंगे। वहीं डॉ. आशा बांगड बच्चों को दांतों की देखरेख, स्वच्छता एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देंगी। साहित्यकार एवं समाजसेवी ज्ञानेश चौबे ने बताया कि शिविर की ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक गतिविधियों ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास को नई दिशा प्रदान की है। इस प्रकार के शिविर बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक सहभागिता और रचनात्मक सोच विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीखने और आनंद का यह समन्वय बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध हो रहा है।
—————————–

0 Views
What do you think?

Leave a Reply