पद्मश्री भूरी बाई को पता ही नहीं और प्रदर्शनी में उनकी पेंटिंग लगाने का कर दिया प्रचार

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भोपाल। किसी बड़े कलाकार के चित्रों की प्रदर्शनी किसी कला दीर्घा में लग गई और उसे पता ही नहीं। यह बात थोड़ी अटपटी लगती है पर ऐसा वास्तव में हुआ है। यह मामला जीटीबी काम्पलेक्स स्थित आदिवासी कला एवं संस्कृति केंद्र का है, जहां गोंड चित्रकार कलावती श्याम की पुण्यतिथि पर शुरू हुई चित्र प्रदर्शनी में गोंड चित्रकार कलावती श्यााम, आनंद सिंह श्याम समेत 10 आदिवासी कलाकारों की करीब दो दर्जन कृतियां प्रदर्शित की गई हैं।

दस दिसंबर तक चलने वाली प्रदर्शनी में आयोजकों द्वारा बताया जा रहा है कि इनमें वृक्षों पर पलते जीवन चक्र पर आधारित भील चित्रकार पद्मश्री भूरी बाई का एक चित्र भी शामिल है। हालांकि इस बारे में जब भूरी बाई को बताया गया तो उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है। केंद्र की ओर से न तो मुझे आमंत्रित किया गया और न ही मुझसे कोई सहमति ली गई। प्रदर्शित चित्र भी मेरा नहीं है। बता दें कि पद्मश्री भूरी बाई का नाम अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी प्रसिद्ध है। उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स भी देश- दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं।
मेरे चित्र की नकल की गई है – भूरी बाई
नवदुनिया से बातचीत में भूरी बाई ने बताया कि मुझे आपके माध्यम से पता चल रहा है कि मेरे चित्र की प्रदर्शनी आदिवासी कला एवं संस्कृति केंद्र में लगाई गई है। नवदुनिया ने जब उन्हें वह चित्र दिखाया, जिसे उनका बताया जा रहा है, तब भूरी बाई ने कहा कि यह चित्र मेरे द्वारा बनाया हुआ नहीं है, बल्कि चित्र की कापी करने की कोशिश की गई है। इसमें मेरा नाम भी नहीं लिखा है।
भूरी बाई का कोई चित्र नहीं किया शामिल
वहीं प्रदर्शनी आयोजित करने वाले केंद्र के संचालक संभव सिंह श्याम ने चंद दिनों पहले पेड़ की टहनियों पर जीवन चक्र दर्शाते चित्र को भूरी बाई द्वारा बनाया हुआ बताया था, लेकिन अब वो कह रहे हैं कि इसमें भूरी बाई का कोई चित्र शामिल नहीं किया गया है।

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