अनोखा तीर, हरदा। शहर के एक निजी नर्सिंग होम में वर्ष 2020 में हुए बहुचर्चित नवजात की गर्दन काटकर हत्या करने के मामले में एक दिन पहले यानि सोमवार को माननीय हाइकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान माननीय न्यायधीश ने प्रकरण में पुलिस की कार्यवाही पर नाराजगी जाहिर की, वहीं जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले में आवश्यक बिन्दूओं पर जबाव प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। हाइकोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से पूछा कि मामले में संलग्न डॉक्टरों को आरोपी क्यों नही बनाया गया? इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को हलफनामा दायर करने के आदेश दिये हैं। अधिवक्ता अनिल जाट ने बताया कि शहर के भगवती नर्सिंग होम में बलात्कार पीड़िता नाबालिक के गर्भपात को लेकर नवजात की गर्दन काटकर बेरहमी से हत्या करने का मामला उजागर हुआ था। प्रकरण में माननीय हाइकोर्ट में पीड़ित परिवार की तरफ से अधिवक्ता अंकित सक्सेना पैरवी कर रहे हैं। प्रकरण की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायधीश ने पुलिस की कार्यवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सर्वप्रथम यह कहा कि डॉक्टर मनीष शर्मा एवं संबंधित अस्पताल तथा इससे जुड़े अन्य डॉक्टरों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। माननीय न्यायालय ने प्रकरण में 22 मई 2020 को गठित मेडिकल बोर्ड पर भी गहरी नाराजगी जताई है। साथ ही मेडिकल बोर्ड के सदस्यों को इस याचिका में पक्षकार बनाने के लिये तीन दिवस में कार्यवाही के लिये पाबंद किया है।
काउंसिल से पूछा सवाल
अधिवक्ता अनिल जाट ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सीबीआई के काउंसिल को एमीकस क्यूरी बनाने के लिये कहा है। माननीय न्यायमूर्ति ने सीबीआई काउंसिल से यह भी पूछा कि क्या माईनर ऑबर्सन हो सकता है? इस पर सीबीआई काउसिल ने कहा कि माईनर का ऑबर्सन नहीं हो सकता है। यह पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन हैं।
हलफनामे के जरिये जबाव
अधिवक्ता श्री जाट ने यह भी बताया कि सुनवाई के दौरान माननीय न्यायधीश ने एक बार फिर पुलिस अधीक्षक हरदा को प्रकरण में डॉक्टरों को आरोपी नहीं बनाये जाने के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामे के माध्यम से जबाव प्रस्तुत करने के लियेे कहा है। वहीं सीएमएचओ हरदा को भी हलफनामे में यह जबाव देना है कि उक्त प्रकरण में किस प्रकार से पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन नहीं हुआ है।

