यह बात गलत है…

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आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पेयजल इंतजाम का दृश्य है। जहां सार्वजनिक प्याऊ गंदगी से पटा हुआ है, वहीं देखरेख के अभाव में यह पिकदान में तब्दील हो गया है। यही कारण है कि लोग खासकर महिलाएं यहां पानी पीने से परहेज करती हैं। ऐसे हालात में उन्हें बाहर से पानी लाने या फिर खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं में शामिल इस व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार मानो बेफिक्र हैं। टंकियों में वॉटर सप्लाई तक ही उन्हें दिलचस्पी है। ज्यादा से ज्यादा विभागीय कार्यालयों की पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं। परंतु यात्रियों की सुविधा को लेकर उनकी तत्परता ठंडी दिखाई पड़ती है। जिससे संबंधितों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा होना लाजमी है। बावजूद कोई सुधार देखने को नही मिल रहा है। जिसके यात्रियों को समस्याओं से दो-चार करना मजबूरी बना हुआ है। इन्हीं अव्यवस्थाओं को लेकर लोग दो टूक कह देते हैं, कि यह बात गलत है।

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