कूनो में 50 प्रतिशत से अधिक चीतों का बचना उपलब्धि

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गणेश पांडे, भोपाल। प्रदेश के पालपूर कूनो पार्क में पिछले साल बसाये गए २० चीतों में से अब 14 चीते बचे हैं। जबकि एक शावक अभी भी जीवित है। इसे भारतीय वन्य जीव संस्थान ने एक बड़ी उपलब्धि मानी है। शावक का जीवित रहना, अपने आप में प्रोजेक्ट की सफलता का प्रतीक है। भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, चीता प्रोजेक्ट की सफलता 25 सालों में आंकी जा सकती है। शार्ट टर्म की बात की जाये तो पहले साल ५० प्रतिशत चीते जीवित बचना, कूनो में चीतों को रहवास मिलना, एक मादा चीता द्वारा शावकों को जन्म देना जिसमें एक शावक के एक साल तक जीवित रहना और कूनो में चीतों के आने से वहां आसपास रहने वाले ग्रामीणों की आय बढ़ना, एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीतों को विदेश से भारत में लाए जाने पर मान्यता प्राप्त वन्यप्राणी विशेषज्ञों ने कहा था कि ट्रांसलोकेट किए जाने वाले चीतों की जीवितता का प्रतिशत ५० रहेगा। यानि बसाये गए चीतों में से ५० प्रतिशत चीते मर जाएंगे। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने भी यही रिपोर्ट तैयार की है।

असफलता भी बता दी रिपोर्ट में

रिपोर्ट में चीतों को बसाने में असफलता भी दर्शाई गई है। दरअसल कूनो में चीतों को बसाना एक प्रयोग है। यदि पांच साल में इनकी आबादी नहीं बढ़ती है तो या तो नए सिरे से इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करना होगी। अथवा चीता प्रोजेक्ट को बंद करना होगा।

17 को वर्षगांठ मनाने आएंगे यादव

आगामी 17 सितम्बर को कूनो में पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा चीतों को छोड़े जाने के एक साल पूरे हो जाएंगे। इसी आधार पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मान रहे हैं कि ५० प्रतिशत से भी अधिक चीतों को बचाना एक उपलब्धि है। आगामी 17 सितम्बर को कूनो में कंेद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव पहुंचने वाले हैं।

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