देदली और मटकुल नदी ऊफान पर

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अनोखा तीर, मसनगांव। बुधवार शाम को 4 बजे हुई एक घंटे की बारिश से कई घर टापू में तब्दील हो गए। मंगलवार के दिन रात्रि में हुई बारिश के बाद नदी नालों में पहले ही बाढ़ आई हुई थी कि बुधवार शाम को हुई 1 घंटे की झमाझम बारिश से खेतों में पानी बह निकला। सड़कों के किनारे बहता हुआ पानी स्कूल के पीछे बहने वाले नाले में आ गया। जिससे पूरा रास्ता पानी के कारण बंद हो गया। वहीं स्कूल के आसपास बने हुए घरों में पानी भरा गया। पानी इतनी तेजी से आया कि ग्रामीणों को संभलने का मौका नहीं मिला। स्टेट हाईवे के किनारे स्कूल के पास बने हुए घर तथा खलिहानों में पानी भरा गया। इस वजह से घर टापू में तब्दील हो गए। लगभग 1 घंटे बाद पानी उतरा, तब कहीं जाकर ग्रामीणों को राहत मिली। स्कूल की छुट्टी होने का समय होने से छोटे बच्चे भी पानी में भिगते हुए घर पहुंचे। दोपहर में तेज गरज चमक होने के बाद पानी आने लगा। आसमान पर बादल छाने के बाद बिजली चमकने और बादल की गड़गड़ाहट के कारण दिन में ही अंधेरा छाया हुआ था। उसके पश्चात हुई बारिश से पूरा क्षेत्र तरबतर हो गया।

देवली और मटकुल उफान पर

नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर पड़ने वाली कड़ोला ग्राम की मटकुल तथा मसनगांव की देदली नदी पहली बार उफान पर आई। मटकुल नदी में पानी अधिक होने से पुल को छूते हुए निकली। वहीं देदली में पानी आने से नदी तथा मोरगा नाले का पानी एक होकर खेतो में बह निकला। मंगलवार को दिन में हल्की बारिश के बाद रात्रि में हुई झमाझम बारिश से नदी नालों में पानी बह निकला। ऊपरी क्षेत्र में पानी गिरने से नदियों में भी बाढ़ आ गई।

रुक गए काम

लगातार बारिश होने की वजह से खेती-किसानी संबंधित कार्य रुके हुए हैं। जिनमें खेतों में होने वाली खरपतवार को निकालने के लिए किसानों द्वारा कुल्पा चलाया जा रहा था। परंतु खेत में नमी होने के कारण बतर नहीं होने से कुल्पे नहीं चल पा रहे हैं। वही किसान खेतों में निंदानाशक दवाओं का स्प्रे भी कर रहे हैं। खेतों में होने वाली घास और अन्य खरपतवार को निकालने के लिए डोरा कुल्पा तथा निंदानाशक दवाओं का स्प्रे चल रहा था। परंतु बारिश होने की वजह से सभी काम बंद हो गए, जो बारिश खुलने के बाद वापस शुरु होंगे। ग्राम के किसान पवन भायरे ने बताया कि खेतों में सोयाबीन की फसल में कुल्पा चलने का सही समय मिला था। लेकिन बारिश की वजह से काम रुक गया। सोयाबीन की फसल में सांवरली के अलावा दिवालिया तथा डंगरी के बेले बहुतायात में उग रहे हैं। जिन्हें निकालने की आवश्यकता है। कुछ निंदानाशक दवाओं से मर रहे हैं तो कुछ को कुल्पा चलाकर निकालना पड़ा है। जिससे सोयाबीन की फसल साफ सुधरी बनी रहेगी। उसमे बीमारिया भी नही लगेगी।

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