पौराणिक महत्व वाला नर्मदा घाट कर रहा जीर्णोद्धार का इंतजार

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

बरसात के दिनों में कीचड़ में करना पड़ता हैं स्नान

भैरूंदा। क्षेत्र की आस्था का केंद्र पौराणिक महत्व वाला नर्मदा तट नीलकंठ घाट जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहा हैं। विधानसभा के अंतर्गत आने वाले जैत, बुधनी, शाहगंज के नर्मदा तटों पर करोड़ों की लागत से निर्माण कार्य हो चुके हैं। लेकिन नर्मदा तट नीलकंठ इस समय निर्माण से दूर हैं। हालांकि यहां पर पिछले दिनों एक करोड़ की लागत से मुक्तिधाम एवं छोटे घाट का निर्माण कराया गया, परंतु वह अपर्याप्त नजर आ रहा हैं। वर्तमान में घाट का निर्माण जहां पर किया गया वह स्थान कोलार नर्मदा का संगम स्थल होने के साथ ही वहां पर अधिक गहराई में पानी होने के कारण यहां नर्मदा स्नान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं। जिससें नर्मदा स्नान करने श्रदालु बीच नदी में बने टापू एवं दाह संस्कार स्थल पहुंचतें हैं। ऐसे में यहां पर परेशानियों के बीच नर्मदा स्नान होता हैं। बरसात के दिनों में तो स्नान करना ना करना एक जैसा ही होता हैं। वर्तमान में बने हुए घाट की सफाई व अन्य घाट के अभाव में श्रदालुओं कीचड़ में ही स्नान करते हैं। उल्लेखनीय हैं कि क्षेत्र का नीलकंठ स्थित मां नर्मदा के तट का पुराणों में उल्लेख हैं। यहां पर भगवान भोले का स्वंयभू शिवलिंग हैं। इस शिवलिंग की लंबाई पाताल में कितनी हैं, इसका अंदाजा कोई भी नही लगा पाया हैं। यहां पर नीलकंठेश्वर महादेव के बारे में कहा जाता है कि माँ नर्मदा एवं मां कौशल्या के तट पर स्वयं नीलकंठेश्वर महादेव प्रकट हुए थे। यहां पर त्रेता युग के समय दक्ष यज्ञ किए जाने के बारे में किदवंती भी हैं। इसके अतिरिक्त यहां नर्मदा एवं माँ कौशल्या के संगम पर स्वयं ओम आकृति भी बनती हैं और नीलकंठेश्वर महादेव का मंदिर इस आकृति का चंद्र बिंदु हैं।

मुक्तिधाम के नीचे घाट निर्माण की लंबे समय से की जा रही मांग
लगभग एक करोड़ रुपए से भी अधिक की लागत से बने हुए मुक्तिधाम के नीचे घाट निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही हैं। लेकिन आम लोगों की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस स्थान पर घाट का निर्माण होने से श्रद्धालु आसानी के साथ नर्मदा स्नान कर सकेंगे। यहां पर पानी की गहराई अधिक नहीं होने से बरसात को छोडक़र अन्य दिनों में इसी स्थान पर पहुंच कर श्रद्धालु स्नान करते हैं। बरसात के दिनों में भी यह घाट स्नान के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

रेत के उत्खनन व दाह संस्कार पर लगेगी लगाम
मुक्तिधाम के नीचे घाट का निर्माण होने से रेत के अवैध उत्खनन पर भी लगाम लग सकेगी। यहां पर ट्रैक्टर ट्रालियों से अवैध रेत अन्य लोगों के द्वारा ढोई जाती है। जिससे कई बार महिलाओं को स्नान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। दूसरी और नर्मदा नदी के तट पर होने वाले दाह संस्कार को भी आसानी से रोका जा सकेगा। अभी भी आम लोगों के द्वारा मुक्तिधाम का उपयोग बरसात को छोडक़र अन्य दिनों में नहीं किया जाता हैं।

अनदेखी का हो रहा शिकार
अमूमन बुधनी विधानसभा के सभी नर्मदा तटों पर घाट का निर्माण मुख्यमंत्री व क्षेत्रीय विधायक शिवराज सिंह चौहान के द्वारा कराया गया हैं। लेकिन जो विकास जैत, बुधनी, शाहगंज में हुआ हैं। वह पूरे क्षेत्र में कहीं पर भी देखने को नहीं मिला हैं। क्षेत्र के नर्मदा तटों की स्थिति किसी से छिपी नहीं हैं। व्यवस्थाओं का अभाव यहां की स्थितियों को उजागर कर रहा है। केवल नर्मदा तट नीलकंठ हीं नहीं बल्कि सातदेव, छीपानेर, मंडी, सीलकंठ में भी ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं। नर्मदा तटों का जो विकास यहां पर होना चाहिए उससे कोसों दूर क्षेत्र में नजर आ रहा है। ऐसा लगता है कि नीलकंठ तट अनदेखी का शिकार हो रहा हैं।

Views Today: 2

Total Views: 288

Leave a Reply

लेटेस्ट न्यूज़

MP Info लेटेस्ट न्यूज़

error: Content is protected !!