कोरोना में आर्थिक तंगी बिगड़ी तो महिलाओं ने स्वरोजगार से पाया नया मुकाम

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खंडवा- कोरोना काल में जब आर्थिक तंगी से घर के हालत बिगड़े तो ऐसे में कुछ महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए घर से काम करने का निर्णय लिया। सिलाई, आचार, पापाड़, क्लाथ, लेडीस ड्रेस, बुनाई, बुटीक, खाना बनाना और टिफिन सेंटर जैसे कई काम कर स्वरोजगार की एक नई मिशाल कायम की।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि शासन प्रशासन और सरकार द्वारा जहां महिलाओं को सशक्तिकरण के माध्यम से सूचित किया जा रहा हैं वहीं अब पुरुषों के साथ ही महिलाएं भी परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहभागी बन रही है। ऐसी ही कुछ महिलाओं के स्वरोजगार पर आधारित व्यवसाय का द समर एग्जिबीशन  खंडवा में भगवान  गणेश की पूजा अर्चना के साथ आयोजन का शुभारंभ प्रोफेसर कॉलोनी में किया। इस आयोजन की खासियत यह रही कि इसमें शहर के अलावा राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से भी महिलाएं अपने प्रोडक्ट के साथ पहुंची और समर कैंप में अपने प्रोडक्ट को प्रचारित किया। सुबह 10 से रात 10 बजे तक चले इस समर एग्जिबिशन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर महिलाओं द्वारा बनाई गई चीजों की खरीदी की।

आयोजक कविता जायसवाल ने बताया कोरोना काल ने हर परिवार का बजट ही खराब कर दिया था। ऐसे में परिवार की आर्थिक तंगी से घर के हालत बिगड़ने में महिलाओं ने घर से विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार के कार्य को बढ़ावा देकर परिवार की आर्थिक  सहभागिता की। ऐसी ही  लगभग 250 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया है जो स्वरोजगार के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रही है। ऐसी ही महिलाओं के प्रोडक्ट जैसे अजरक, इकत, बटीक, कलमकारी, दाबू, लेहरिया, बांघनी, चिकनकारी, फुलकारी की साड़ी एवं सूट, पुष्प, आभूषण, हस्तशिल्प, खाद्य स्टॉल सहित कई उत्पाद इस एग्जिबिशन में  उपलब्ध रहें। शहरवासियों नई-नई वैरायटी की चीजों को देखा और खरीददारी भी की। इससे स्वरोजगार करने वाली महिलाओं का आत्मबल बढ़ा है।

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