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Saturday, 10 October 2026
हरदा

चरणदास चोर की अभ्यास प्रस्तुति के साथ नाट्य कार्यशाला का समापन

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अनोखा तीर, हरदा। इंटेलेक्चुअल पब्लिक वेलफेयर एंड ट्रेनिंग फॉर आर्ट सोसायटी द्वारा आयोजित नाट्य कार्यशाला का समापन हबीब तनवीर के प्रसिद्ध नाटक चरणदास चोर की अभ्यास प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। नाटक एक लोककथा पर आधारित है जिसमें चोर की सत्यवादिता को दर्शाया गया है। चरणदास चोर है उसने अपने गुरु से झूठ नहीं बोलने के अतिरिक्त , मस्ती मस्ती में चार प्रण किए हैं। पहला कभी हाथी पर बैठकर जुलूस में नहीं जाऊंगा, दूसरा सोने की थाली में खाना नहीं खाऊंगा, तीसरा किसी देश का राजकुमार बनकर गद्दी पर नहीं बैठूंगा और चौथा किसी देश की रानी से विवाह नहीं करूँगा। कहानी यहीं से मोड़ लेती है और यह सारी स्तिथियां उसके सामने आती हैं वह इन सबको ठुकरा देता है, अंत में राज की रानी उसके साथ विवाह का प्रस्ताव रखती है, उसे अपने गुरु को दिया वचन याद रहता है और वह विवाह का प्रस्ताव ठुकरा देता है। रानी चरणदास को विवाह का प्रस्ताव वाली बात बाहर किसी और को नहीं बताने को कहती है। इस पर चरणदास का यह जबाव आता है कि वह अपने गुरु को झूठ नहीं बोलने का भी वचन दे चुका है। इस पर रानी अपनी बदनामी के डर से चरणदास को मृत्युदंड दे देती है। नाटक का गीत संगीत जय पुजारी ने तैयार किया, निर्देशन संजय तेनगुरिया एवं सह निर्देशन इरशाद खान ने किया। रानी की भूमिका में स्नेहा एवं रिमझिम, दासी अन्वेशा जोशी, पुरोहित कंचन शर्मा, गुरु विशाल भाटी, मुनीम गुलशन एवं चरणदास की भूमिका में इकराम कुरैशी तथा मंत्री की भूमिका में वेदांत ने प्रभावित किया।

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