खुलकर बरसे बदरा, मगर उमस बरकरार

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अनोखा तीर, हरदा। इस बार की बारिश मानो आने का नाम ही नहीं ले रही। बीते वर्षों में 15 जून तक प्राय: मानसून का आगमन हो जाता था और इसके पूर्व प्री-मानसून बारिश का एकाध झल्ला भी हो जाता था। मगर इस साल न जाने कैसी नजर लगी कि लोग हल्की बूंदाबांदी के लिए भी तरस गए। बहरहाल गत दिवस मौसम विभाग द्वारा संपूर्ण मध्यप्रदेश में बारिश सहित हरदा-बैतूल जिले में भारी बारिश होने का एलर्ट जारी किया गया था। सो इसका असर भी क्यों न हो। इस एलर्ट के चलते गुरूवार की शाम बादलों को बरसना ही पड़ा। हालांकि विभाग के अधिकारी यह कहकर बच सकते हैं कि लोगों को बचाने के लिए हाई एलर्ट किया था। यदि देर-सबेर हैवी-रैन हो जाए तो कोई यह न कहे कि हमें तो कोई सूचना नहीं थी। बहरहाल पानी का गिरना था सो गिरा भले ही वो कम या ज्यादा हो।

गुरूवार को झलक दिखाई, शुक्रवार को कुछ देर बरसे

गत शाम को अचानक देखते ही देखते आसमान पर कुछ आवारा बादलों ने डेरा जमा लिया और अचानक कुछ देर बरसकर चले गए। इससे न तो मौसम में ठंडक का एहसास हुआ और न ही सड़कें भी धुल पाईं। हां रात्रि में कमरों की तपिश से बढ़ी उमस ने लोगों को बेचैन अवश्य कर दिया। इसके बाद दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर में हरदा के आसमान पर फिर अचानक आए कुछ बादलों ने कल की कसर निकाल ली। इस दौरान हुई बारिश हालांकि धरती की प्यास तो नहीं बुझी, मगर लोगों के चेहरे जरूर खिल उठे। इससे मौसम हल्की ठंड का एहसास हुआ और आसपास पानी भी जमकर बहा। इस वर्षा से यह भी मेहसूस हुआ कि अब मानसून आसपास ही है। बहरहाल जल ही जीवन है। इसलिए क्षेत्र की खेती संपदा और जनजीवन के लिए आई यह मुबारक बारिश सबको खिला गई है।

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