आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर का नवीन वार्ड या यूं कहें कि शहरी सीमा पर बसे इलाके का दृश्य है। जहां अब तक व्यवस्थाओं का विस्तार प्रारंभ नही हुआ है। पुराने ढर्रे पर यहां की व्यवस्थाएं संचालित हैं। जिसके चलते शहरी क्षेत्र की पूर्ण अनुभति फिलहाल कोसों दूर है। कच्ची सड़के, सड़क पर बहता पानी तथा आदमकद ऊंचाईं पर लटके बिजली के तार इन सबका परिचायक है। जानकारी के अनुसार शहर के वार्ड क्रमांक 31 एवं 32 में बिजली के खम्बे झुक रहे हैं, जो तेज हवा-आंधी में धाराशायी हो सकते हैं। इतना ही नही, बिजली के तार बड़े-बड़े वृक्षों से टकरा रहे हैं। जिसके चलते तार टूटने का डर रहता है। वहीं किसी अप्रिय घटना का अंदेशा बना रहता है। स्थानीय किसानों ने कहा कि सालों पुरानी ग्रामीण क्षेत्र की लाइन को दुरूस्त करने की जरूरत है। जगह-जगह इसके खंबे आड़े हो रहे हैं। यह भी कहा कि इन इलाकों में विकास कार्यो की रफ्तार भले ही धीमी हो, परंतु आबादी क्षेत्र का विस्तार निरंतर जारी है। लेकिन, इन सबके बीच सुगम आवागमन की व्यवस्था, पेयजल का स्थायी इंतजाम एवं गंदे पानी की निकासी का अभाव तथा आड़े-तिरछे बिजली के खंबो को देखकर लोग कह ही देते हैं, कि यह बात गलत है।
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