आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह छीपानेर रोड स्थित दूध डेयरी के गली नंबर एक में पशुपालन विभाग की बाउंड्रीवाल है। जो लंबे समय से जस की तस पड़ी है। गनीमत है कि बाउंडीवाल के उस ओर बड़ा नाला है। जिस वजह से किसी अप्रिय घटना का डर नही है। परंतु सवाल यह हैं कि आखिर कब तक ये बाउंड्रीवाल हवा में झूलती रहेगी ? गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य को लेकर क्या कदम उठाएं व उनके क्या परिणाम रहे ? जीर्ण-शीर्ण बाउंड्रीवाल को लेकर आगे क्या कार्ययोजना है ? जैसे कई अन्य सवाल उठना लाजमी है। बता दें कि इससे पहले पशुपालन विभाग का संचालन गुलजार भवन के ठीक साइड में होता था। यहीं पर मवेशी समेत समस्त पशुधन का उपचार किया जाता था। किंतु इन सबके लिये यहां जगह का अभाव था। साथ ही शहर का व्यस्ततम इलाका होने के कारण पशु पालक तथा नागरिक दोनों को दिक्कतें होती थीं। इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही दूध डेयरी परिसर में पशुपालन विभाग का नया कार्यालय मंजूर हुआ, जो विगत कुछ सालों पहले बनकर तैयार हो चुका है। वहीं इसके कुछ समय बाद परिसर में ही पशुधन रोग प्रयोगशाला का भी निर्माण हो चुका है। लेकिन संपूर्ण निर्माण कार्य को नजदीक से देखें तो मुख्य कार्यालय भवन को छोड़कर शेष पूरे निर्माण की कलई खुली पड़ी है। हाल ही में बनकर तैयार प्रयोगशाला चारों तरफ से क्षतिग्रस्त होकर गिरने अथवा धंसने की कगार पर है। खैर, यह सब विभाग प्रमुख की चिंता का विषय है या यूं कहें कि विभागीय संम्पत्ति की देखरेख तथा रखरखाव का मुद्दा हो। किंतु यह भी सच है कि किसान तथा पशुपालक क्षतिग्रस्त निर्माण को देखकर कहना नही चूकते, कि यह बात गलत है।

