टिकिट की आस में दावेदारों की लगी कतार
नितेश गोयल, हरदा। विधानसभा चुनाव को समीप देखते हुए टिकिट की आस में लगे नेता एकाएक क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय नजर आने लगे है। हरदा विधानसभा क्षेत्र में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होता आया है। इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों में दावेदारों की लम्बी फेहरिस्त दिखाई दे रही है। हालांकि भाजपा में कोई भी खुलकर वर्षों से हरदा विधानसभा सीट पर राज करने वाले कृषि मंत्री कमल पटेल का खुला विरोध कर अपने आपको प्रबल दावेदार नहीं बता रहा है। लेकिन मन में यह सोच लिए क्षेत्र में सक्रिय होकर इस उम्मीद में बैठा है कि यदि बिल्ली के भाग्य से छीका टूटा तो उसे इसका लाभ मिलकर भाजपा से टिकिट मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में तो यह स्थिति है कि आधा दर्जन से अधिक दावेदार अपने आपको हरदा विधानसभा क्षेत्र का कांग्रेस प्रत्याशी मानकर क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हो गए है। कुछ प्रत्याशी तो ऐसे है जो विधानसभा की टिकिट और अपना वर्चस्व क्षेत्र में दिखाने के लिए अभी से लाखों रुपए खर्च कर सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन तक करवा रहे है। कांग्रेस-भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ताओं और आमजनों से जब अनोखा तीर ने दावेदारों के संबंध में चर्चा की तो दोनों ही दलों के कुछ प्रमुख दावेदारों के नाम सामने आए है। जिनकी क्षेत्र में सक्रियता दिखाई दे रही है उनका ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे है।
भाजपा के मुख्य दावेदार
कमल पटेल : हरदा की राजनीति में भाजपा से बीते 25 सालों में अभी तक हरदा विधानसभा सीट के लिए कमल पटेल का विकल्प दिखाई नहीं दिया है। वर्तमान में हरदा विधायक श्री पटेल मध्यप्रदेश शासन में कृषि मंत्री के महत्वपूर्ण पद पर विराजित है। भाजपा की आलाकमान के पास भी अभी कोई ऐसा कारण नहीं है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकिट ना देकर किसी अन्य को हरदा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से उम्मीदवार बनाए। श्री पटेल के कार्यकाल को देखते हुए वर्तमान में तो यही प्रतीत हो रहा है कि आगामी भाजपा प्रत्याशी श्री पटेल ही होंगे। लेकिन राजनीति में ऊंट कब किस करवट बैठ जाए यह किसी को भी पता नहीं होगा।
सुरेन्द्र जैन : दो बार हरदा नगरपालिका अध्यक्ष रह चुके सुरेन्द्र जैन को भी हरदा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का दावेदार कहा जा सकता है। हालांकि खुले तौर पर तो उन्होंने कभी आलाकमान से टिकिट की मांग नहीं की है, लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कहीं न कहीं उनके चाहने वाले श्री जैन को हरदा विधानसभा से टिकिट दिलाने की लाबिंग कर रहे है। कुछ दिन बाद ही उनके जन्मदिन पर एक धार्मिक आयोजन भी आयोजित किया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था। वर्तमान में महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद उनका राजनैतिक कैरियर अभी थमा हुआ सा दिखाई दे रहा है। इसीलिए इस बार हो सकता है कि वह व उनके समर्थक प्रमुखता से भाजपा से उनके लिए टिकिट की मांग करें।

अमर सिंह मीणा : जिले में भाजपा अध्यक्ष अमर सिंह मीणा को भाग्यशाली अध्यक्ष का दर्जा प्राप्त है। कहा जाता है कि उनके कार्यकाल में भाजपा को हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। हालांकि अभी तक ऐसा उनके द्वारा यह महसूस नहीं करवाया गया है कि वह हरदा विधानसभा की टिकिट दावेदारी कर सकते है। लेकिन क्षेत्र के लोग और राजनीति के खिलाड़ी उन्हें भी भाजपा में दावेदार के रुप में प्रस्तुत करते है। लेकिन वह दावेदारी भी तभी कर सकते है जब खुद कमल पटेल उनसे कहें कि तुम्हें यह चुनाव लड़ना है। क्योंकि ऐसा दिखाई नहीं देता कि वह खुद भाजपा आलाकमान से टिकिट की मांग कर सकते है।
संदीप पटेल : कमल पटेल की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए उनके ज्येष्ट पुत्र संदीप पटेल अब पूरी तरह तैयार नजर आ रहे है। हरदा जिले में दो सफल खेल आयोजन करवाने के बाद युवाओं के वह आईकान नजर आते है। यदि किसी कारण से कृषि मंत्री श्री पटेल को आलाकमान ने दूसरे क्षेत्र या पद पर बैठाया तो श्री पटेल अपने पुत्र को हरदा विधानसभा क्षेत्र की कमान सौंप सकते है। हालांकि भाजपा आलाकमान और खुद प्रधानमंत्री परिवारवाद का विरोध करते है, लेकिन जब समीकरण और जीतने वाले उम्मीदवार की बात आती है तो समझौता हो ही जाता है।
कांग्रेस के मुख्य दावेदार
डॉ. आरके दोगने : कृषि मंत्री कमल पटेल को हार का स्वाद चखा चुके पूर्व विधायक डॉ. आरके दोगने कांग्रेस के सबसे प्रबल दावेदार है। पिछला चुनाव भी वह कुछ ही वोटों से हारे थे। इस कारण से ऐसा नहीं लगता कि उन्हें टिकिट देने में कांग्रेस की आलाकमान को कोई सोच विचार करना पड़ेगा। क्योंकि गुर्जर समाज का हरदा विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा वोट बैंक है। खुद डॉ. दोगने प्रदेश के गुर्जर समाज संगठन में महत्वपूर्ण पद पर काबिज है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि एक बार और उन्हें कांग्रेस दावेदार बना सकती है। हालांकि पिछले चुनाव में जो गुटबाजी के कारण उन्हें हार का स्वाद चखना पड़ा था वह गुट अभी भी उनसे नाराज ही दिखाई दे रहा है। इसलिए कांग्रेस में टिकिट को लेकर खींचतान तो आखिरी समय तक दिखाई देगी।
अवनी बंसल : उच्च न्यायालय की अधिवक्ता और राहुल गांधी के साथ पूरे देश में भारत जोड़ों यात्रा के तहत पदयात्रा करने वाली अवनी बंसल का नाम भी पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस की प्रत्याशी के प्रबल दावेदार के रुप में लिया जा रहा है। प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की बेटी अवनी इन दिनों क्षेत्र में सक्रियता के साथ भारत जोड़ों के तहत गांव-गांव जाकर कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। वर्तमान में युवाओं को खेल से जोड़ने के लिए भारत जोड़ों खेल प्रतियोगिता भी आयोजित की है। यदि हरदा विधानसभा में नया चेहरा और गांधी परिवार के हिसाब से टिकिट वितरण का कार्य हुआ तो अवनी बंसल कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ सकती है।
लक्ष्मीनारायण पंवार : पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पंवार हरदा की कांग्रेस राजनीति में अपना एक अलग वजूद रखते है। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से उन्हें भी प्रमुख दावेदार के रुप में माना जा रहा है। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में उन्होंने संगठन को मजबूत करने के साथ ही विपक्ष में रहते हुए मजबूती से कार्य किए है। कुछ दिन पूर्व ही हरदा में जीतू पटवारी को बुलवाकर उन्होंने एक सफल आयोजन भी किया है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में दौरे कर अपनी पकड़ मजबूत बनाने में लगे है।
यह भी है कतार में
कांग्रेस में दावेदारों की लिस्ट बड़ी लम्बी है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत टाले, युवा नेता मनीष शर्मा, किसान नेता केदार सिरोही को भी कांग्रेस से टिकिट का दावेदार माना जा रहा है। सभी दावेदार अपने-अपने हिसाब से क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने के लिए कार्य कर रहे है। हालांकि यह तो समय के गर्त में है कि कांग्रेस किसे टिकिट देगी और किसके सिर पर जीत का सेहरा सजेगा।



