कर्मयोगी माधव प्रसाद पारे का निधन

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– नागरिक बोले, सहज एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे
अनोखा तीर, हरदा। नार्मदीय ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ माधव प्रसाद पारे सहज एवं मिलनसार व्यक्तित्व थे। जल संसाधन विभाग में पदस्थापना दौरान उनका कुशल व्यवहार तथा कर्तव्यनिष्ठा के चलते अन्य कर्मचारियों के लिये किसी प्रेरणा से कम नही थे। वहीं एक उदाहरण भी थे कि शासकीय कर्मचारी की कार्यप्रणाली कैसी हो। बतौर शासकीय कर्मचारी उन्होंनें सेवानिवृत्त होने के बाद समाजिक स्तर पर अपनी सक्रियता को बनाए रखा। वे सही मायने में कर्मयोगी थे। यह बातें नार्मदीय ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ सदस्य अशोक नेगी ने स्थानीय मुक्तिधाम में ७२ वर्षीय स्व. माधव प्रसाद पारे के अंतिम संस्कार के बाद वहां आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कही। भाजपा नेता एवं पूर्व नपाध्यक्ष सुरेन्द्र जैन ने उनके असमयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। वहीं उनके सानिध्य में बितायें गए क्षणों को याद किया। उन्होंनें यह भी कहा कि स्व. माधव पारे के जीवन में पारदर्शी व्यवहार तथा नैतिक मूल्य सदैव शीर्ष पर रहे। यही संस्कार उन्होंनें अपने पुत्र संदेश पारे को भी दिए, जो समाज के हितार्थ हम सबके सामने है। स्वर्गीय माधव पारे के आदर्श परिवार की मूल पूंजी है। नार्मदीय ब्राह़्मण समाज के अध्यक्ष किशोर शुक्ला ने माधव भैया के निधन को समाज के लिए बड़ी क्षति बताया। कहा कि सदैव दूरगामी सोच को दृष्टिगत रखकर समाज हित में युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करते रहे, जो स्मृति पटल पर अमिट रहेगा। श्रद्धांजलि सभा में सर्व ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ सदस्य एलएन पाराशर, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द व्यास, पत्रकार लोमेश गौर एवं सिंचाईं विभाग के श्री उमरिया ने भी दिवंगत आत्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। अंत में उपस्थित लोगों ने दो मिनिट का मौन रखकर स्व. माधव प्रसाद पारे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त नार्मदीय ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ सदस्य माधव प्रसाद पारे का सोमवार को असमयिक निधन हो गया है। परिवारजनों से मिली जानकारी के अनुसार दोपहर में हार्ट अटैक के चलते उन्हें प्रायवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। जहां उनकी हालत में सुधार नही दिखने पर इलाज के लिये बाहर रैफर कर दिया था। इसके तुरंत बाद शाम के समय निजी गाड़ी से उन्हें इन्दौर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में कन्नौद के पास श्री पारे ने अंतिम सांस ली। इस बात की पुष्टि होने पर कन्नौद से गाड़ी को वापस हरदा लेकर आए। इस दौरान पारिवारिक सदस्यों के आंसू थम नही रहे थे। इधर, श्री पारे के निधन की खबर जहां-जहां तक पहुंची, वहां से लोग उनके अंतिम दर्शन पाने के लिये रवाना होने लगे थे। दूसरे दिन यानि मंगलवार सुबह ज्ञानगंगा स्कूल के पास निज निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली, जो स्थानीय मुक्तिधाम पहुंची। जहां पुत्र संदेश पारे ने पिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधियों समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अंत में पंच लकड़ी देकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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