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Thursday, 22 October 2026
सीहोर

मूंग खरीदी को लेकर किसानों का हल्लाबोल

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-6 जुलाई को होगा घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन
अनोखा तीर, भैरुंदा। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा जारी नई खरीदी नीति के विरोध में भैरुंदा क्षेत्र के किसानों ने किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान तहसील पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार सौरभ शर्मा को ज्ञापन सौंपकर मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग की। ज्ञापन में किसानों ने बताया कि शासन ने इस वर्ष समर्थन मूल्य पर मूंग की पूरी उपज खरीदने के बजाय कुल अनुमानित उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत ही खरीदे जाने का निर्णय लिया है। शासन द्वारा सीहोर जिले के लिए मूंग का औसत उत्पादन 12 क्विंटल प्रति हैक्टेयर निर्धारित किया गया है। इस आधार पर किसानों से मात्र 3 क्विंटल प्रति हैक्टेयर मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। किसानों का कहना है कि अधिकांश किसानों का वास्तविक उत्पादन इससे कहीं अधिक है। ऐसे में बाकी उपज उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा। किसान स्वराज संगठन ने ज्ञापन में मांग की है कि सरकार 25 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदे। साथ ही संगठन का कहना है कि यदि उत्पादन मानक तय करना ही है तो प्रति हैक्टेयर 15 क्विंटल उत्पादन मानकर उसी अनुरूप खरीदी की जाए तथा एमएसपी गारंटी के प्रावधान लागू किए जाएं। ज्ञापन सौंपने से पहले मंडी परिसर में किसानों की बैठक आयोजित की गई। जिसमें आगामी 6 जुलाई को प्रस्तावित आंदोलन की रणनीति तय की गई। बैठक के बाद किसान पैदल मार्च करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे और परिसर में बैठकर ताली बजाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन की तैयारी
किसान स्वराज संगठन ने घोषणा की है कि 6 जुलाई को भैरुंदा में घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ विशाल रैली निकाली जाएगी तथा तहसील और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। किसान खाने-पीने का सामान, गैस सिलेंडर, चूल्हे और तंबू सहित आवश्यक सामग्री लेकर पहुंचेंगे ताकि आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना जारी रखा जा सके। संगठन ने मांग की है कि जिला कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुनें और शासन तक उनकी बात पहुंचाएं। यदि प्रशासन ने समय रहते समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसान नेताओं का कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। लेकिन यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की तो चक्काजाम सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन भी किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार की 25 प्रतिशत खरीदी की नीति से जिले के हजारों मूंग उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा इसलिए इस निर्णय में तत्काल संशोधन किया जाना चाहिए।

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