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Sunday, 18 October 2026
सीहोर

केंद्रीय कृषि मंत्री के मौन पर कांग्रेस का हमला

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-मध्य प्रदेश के किसान लाचारी और सरकारी व्यवस्था के फेर में बेहाल: विक्रम शर्मा

अनोखा तीर, भैरुंदा। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयानों और सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है। प्रदेश के किसानों के लिए लंबे समय तक मसीहा की भूमिका निभाने वाले शिवराज सिंह चौहान का अपने ही गृह राज्य मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मौन रहना गंभीर सवालों के घेरे में है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव विक्रम मस्ताल शर्मा ने केंद्रीय कृषि मंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए इसे प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय और उनकी बेबसी का प्रतीक करार दिया है। कांग्रेस नेता मस्ताल ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा देशभर में मूंग और उड़द की खरीद के दावे तो जोर-शोर से किए जा रहे हैं। लेकिन जब बात मध्य प्रदेश की आई तो उनके चेहरे पर एक अजीब सी चुप्पी नजर आई। विक्रम शर्मा ने कहा कि यह वही मध्य प्रदेश है जिसके किसानों के बलबूते पर ही पूरे देश में कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की थीं और लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार जीतकर देश में अपना गौरव बढ़ाया था। आज उसी प्रदेश का किसान मूंग की तुलाई समर्थन मूल्य और खाद की भारी किल्लत के चलते दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। विक्रम मस्ताल ने सवाल किया कि आखिर केंद्रीय कृषि मंत्री अपने ही संसदीय क्षेत्र के किसानों की पीड़ा पर खुलकर बात करने से क्यों झिझक रहे हैं? उन्होंने इस बात पर आशंका जताई कि क्या केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार के बीच किसी प्रकार की खटपटाहट चल रही है। जिसका खामियाजा अब सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश के किसानों के अच्छे दिन पूरी तरह से लद चुके हैं और वह केवल नारों और वादों के बीच पिसकर रह गए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों विशेषकर बुधनी विधानसभा क्षेत्र की स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है। किसान अपनी फसलों की बुआई और देखभाल के लिए खाद की तलाश में घंटों लाइनों में खड़ेे होने को मजबूर हैं। पट्टाधारी किसानों की स्थिति तो और भी अधिक खराब है। जिन्हें यह तक स्पष्ट नहीं है कि खाद पाने की प्रक्रिया क्या है और उन्हें कहां से खाद मिलेगी। इसके अतिरिक्त खेती के कार्य हेतु डीजल के लिए भी किसानों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। गेहूं की खरीद का मामला हो या फिर मूंग की तुलाई, किसानों का समय और पैसा दोनों ही बदहाल व्यवस्था की भेंट चढ़ रहे हैं। तेज धूप और बारिश की परवाह किए बिना किसान खुले आसमान के नीचे अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं, लेकिन उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। कांग्रेस प्रदेश सचिव ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री का यह मौन यह दर्शाता है कि वह या तो अपनी लाचारी प्रदर्शित कर रहे

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