-प्रशासन की सख्ती के बाद खुला रास्ता, करीब चार किलोमीटर तक लगी वाहनों की कतार
अनोखा तीर, हरदा/मसनगांव। जल संसाधन विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के लिए समय पर पानी नहीं मिलने से नाराज किसानों ने गुरुवार को स्टेट हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। सोनतलाई सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले रोलगांव, बीड और कमताड़ा गांव के किसानों ने दोपहर 11.30 बजे से सड़क पर धरना शुरू किया, जो करीब पांच घंटे 15 मिनट तक चला। अंतत: शाम पौने पांच बजे प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए किसानों को हटाकर जाम खुलवाया। किसानों का आरोप था कि पिछले आठ दिनों से नहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जिससे खेतों में खड़ी मूंग की फसल सूखने लगी है। किसानों ने बताया कि वे लगातार जल संसाधन विभाग से पानी बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच किसान सड़क पर पुस्टे बिछाकर बैठे रहे। आंदोलन में सचिन यादव, संदीप शर्मा, मनोज पंचोली सहित करीब 35 से 40 किसान शामिल रहे। किसानों ने एक दिन पहले ही कार्यपालन यंत्री सोनम वाजपेई को आवेदन देकर 24 घंटे के भीतर पानी बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने हाईवे जाम कर दिया। स्थिति संभालने के लिए सोनतलाई सब डिवीजन के एसडीओ रोहन विलियम्स मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद हरदा एसडीएम अशोक डेहरिया, सिविल लाइन थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी, तहसीलदार राजेंद्र पवार, नायब तहसीलदार और एसडीओपी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि रात आठ बजे तक क्षेत्र की नहर में पानी पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं मिलने से किसान धरने पर डटे रहे। इस दौरान सड़क पर फंसे वाहन चालकों ने भी किसानों से अपनी परेशानी साझा की। वाहन चालकों का कहना था कि सुबह से भूखे-प्यासे सड़क पर खड़े रहने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने सख्ती दिखाई और किसानों को सड़क से हटाकर पुलिस वाहन में बैठाया गया। हालांकि किसान लगातार यह कहते रहे कि जब तक विभाग की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
चार किलोमीटर तक लगा जाम
करीब पांच घंटे तक चले जाम के कारण हाईवे पर बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई। वहीं दोपहिया, चारपहिया वाहन और बसों को गांव के अंदर से बायपास मार्ग के जरिए निकाला गया। संकरी गलियों से वाहनों की आवाजाही होने के कारण ग्रामीणों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गांव के भीतर ट्रैक्टर, बस, कार और अन्य छोटे वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
एक हजार एकड़ की मूंग फसल पर संकट
किसानों ने बताया कि सोनतलाई सब डिवीजन में लगभग 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था है, लेकिन इसमें से केवल 2663 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की फसल को नहर का पानी मिलता है। किसानों का आरोप है कि आखिरी पानी के समय विभाग पानी की कमी बताकर पल्ला झाड़ लेता है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। किसानों के अनुसार करीब एक हजार एकड़ क्षेत्र में पानी नहीं पहुंचने से मूंग की फसल सूखने का खतरा मंडरा रहा है। प्रति एकड़ लगभग 15 हजार रुपए की लागत लग चुकी है। समय पर पानी नहीं मिलने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पुलिस और किसानों में बहस
जाम हटाने के दौरान पुलिस प्रशासन और किसानों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी द्वारा रास्ता खुलवाने के प्रयास के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और सड़क पर लेटकर विरोध जताया। किसानों का कहना था कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। तेज गर्मी के बीच करीब एक दर्जन किसान सड़क पर बैठे रहे।
इनका कहना है…
हरदा एसडीएम अशोक डेहरिया ने बताया कि किसानों को समझाइश देकर रात आठ बजे तक पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन किसान नहीं माने, इसलिए उन्हें हटाकर यातायात शुरू कराया गया।
-सिविल लाइन थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी ने कहा कि समझाने के बाद भी किसान जाम खोलने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद सख्ती से कार्रवाई कर रास्ता खुलवाया गया।
-जल संसाधन विभाग के सोनतलाई सब डिवीजन के एसडीओ रोहन विलियम्स ने बताया कि तवा डैम में पानी की कमी का असर आखिरी पानी में दिखाई दे रहा है। पानी का बहाव कम होने से नहरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे किसान आखिरी टेल क्षेत्र में हैं, फिर भी पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
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