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Sunday, 18 October 2026
हरदा

सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए बुरी खबर

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-खरीददारों का टोटा होने से घट सकते हैं दाम
-अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे महंगा है भारतीय सोयाबीन, इसलिए घटा निर्यात

अनोखा तीर, हरदा। मध्यप्रदेश देश के सर्वाधिक सोयाबीन उत्पादक राज्यों की सूची में सबसे अग्रणी है। प्रति वर्ष उत्पादन लागत बढ़ने और उत्पादन घटने के बावजूद किसानों द्वारा कपास को छोड़कर सोयाबीन को अपनाया गया है। वैसे तो पिछले कुछ सालों से लगातार मौसम की मार झेल रही सोयाबीन से परेशान होकर कुछ किसानों ने मक्का उत्पादन की ओर रुख किया है। लेकिन इसके बावजूद भी मध्यप्रदेश के बड़े रकबे में सोयाबीन उत्पादन किया जाता है। इस बार देश के सोयाबीन किसानों के लिए एक और चिंता की खबर सामने आई है। सोयाबीन के निर्यात में इस साल भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक भारत का सोयाबीन निर्यात इस साल घटकर लगभग आधा रह सकता है, जो पिछले चार साल का सबसे निचला स्तर होगा। रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयाबीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिसके चलते इसकी मांग घट गई है। हाल ही में सोयाबीन के दाम में करीब 50 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई है। ऐसे में विदेशी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, विशेष रूप से दक्षिण अमेरिका के देश भारत से बाजार छीनते नजर आ रहे हैं। वैश्विक बाजार में जहां भारतीय सोयाबीन की कीमत करीब 680 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है, वहीं दक्षिण अमेरिका का माल लगभग 430 डॉलर प्रति टन के भाव पर उपलब्ध है। इस बड़े अंतर के कारण भारतीय निर्यातकों को ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया है। नतीजतन इस सीजन में निर्यात घटकर करीब 9 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20 लाख टन कम है। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर सोयाबीन किसानों पर पड़ने वाला है। निर्यात घटने का मतलब है कि घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग भी कम होगी, जिससे उसकी कीमतों पर दबाव बनेगा। पहले से ही लागत और मौसम की मार झेल रहे किसानों की आमदनी घटने का खतरा और बढ़ गया है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख सोया उत्पादक राज्यों में किसान पहले ही कीमतों को लेकर असंतोष जता चुके हैं। कई बार आंदोलन की स्थिति भी बनी है। हालांकि सरकार ने हस्तक्षेप कर किसानों को उचित दाम दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन के निर्यात पर असर का एक बड़ा कारण उत्पादन में आई कमी भी है। हाल के महीनों में महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान हुआ, जिससे सप्लाई घट गई। सप्लाई कम होने से कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका बुरा असर निर्यात पर पड़ा है। भारत का सोयाबीन बाजार परंपरागत रूप से मजबूत रहा है और बांग्लादेश, नेपाल, यूरोप समेत कई देशों में इसकी अच्छी मांग रही है। गैर जीएम फसल होने के कारण विदेशी बाजारों में इसका खास महत्व है। लेकिन बढ़ती कीमतों ने इस आर्थिक लाभ को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि निकट भविष्य में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। ऐसे में निर्यात में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है, जिससे सोयाबीन किसानों की कमाई पर लंबे दिनों तक खराब असर पड़ने की आशंका है। नतीजा साफ है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो सोयाबीन किसानों को कम भाव, घटती मांग और बढ़ती लागत तीनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
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