गेहूं खरीदी व्यवस्था चरमराई, स्लॉट बुकिंग और तुलाई में देरी से किसान परेशान

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– खरीदी केंद्रों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें, रात-दिन इंतजार को मजबूर किसान

अनोखा तीर, नर्मदापुरम। जिले में शासकीय समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। कहीं सर्वर डाउन होने से काम प्रभावित हो रहा है तो कहीं स्लॉट बुकिंग नहीं होने और तुलाई में देरी के कारण किसान कई-कई दिनों तक खरीदी केंद्रों के बाहर इंतजार करने को मजबूर हैं। जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों और वेयरहाउसों के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क किनारे खड़ी दिखाई दे रही हैं। किसान तेज धूप में दिनभर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं रात के समय भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर ही समय गुजारने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि लंबे इंतजार के कारण दुर्घटना और गेहूं चोरी होने की आशंका भी बनी हुई है।
हम्मालों की कमी और भरे वेयरहाउस बने बड़ी समस्या
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाधर सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की गेहूं उपज की सुचारू खरीदी कराने में असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि जिन वेयरहाउसों में खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, वे पहले से ही अनाज से भरे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर हम्मालों की भारी कमी के कारण तुलाई कार्य धीमा पड़ गया है। उन्होंने बताया कि कई किसान चार-चार दिन तक लाइन में लगे रहते हैं, लेकिन तुलाई नहीं हो पाती। इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्लॉट बुकिंग की कम अवधि से बढ़ी परेशानी
जिले में स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को लेकर भी किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग समय पर नहीं हो रही, जबकि जिन किसानों को स्लॉट मिल रहा है उन्हें तुलाई के लिए केवल एक से दो दिन का समय दिया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के जिला संगठन मंत्री सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि कई किसानों के पास 300 से 400 क्विंटल तक गेहूं रखा हुआ है। अधिकांश छोटे और मध्यम किसानों के पास केवल एक ट्रैक्टर-ट्रॉली है, ऐसे में कम समय में पूरा गेहूं खरीदी केंद्र तक पहुंचाकर तुलाई कराना संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि कई बार किसान चार दिन तक लाइन में लगा रहता है और इसी दौरान उसकी स्लॉट की तारीख निकल जाती है, जिससे उसे दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
भुगतान में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि जिन किसानों की तुलाई पहले ही हो चुकी है, उन्हें भी अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। तुलाई और भुगतान दोनों में देरी के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
किसान संगठनों ने प्रशासन से की मांग
किसान संगठनों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि खरीदी केंद्रों पर तत्काल हम्मालों की संख्या बढ़ाई जाए और जिन वेयरहाउसों में जगह नहीं बची है वहां संचालित खरीदी केंद्रों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। साथ ही स्लॉट बुकिंग की समय सीमा बढ़ाकर किसानों को पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे बिना परेशानी अपना गेहूं बेच सकें। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसानों का आक्रोश बढ़ सकता है और आंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।
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