सच्चे अर्थों में एमपी की धरती पर प्रधानमंत्री के सपनों को साकार कर रहे गौरीशंकर मुकाती : विनय सहस्त्रबुद्धे

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 ‘मिशन लाईफ और समृद्ध किसान सुरक्षित पर्यावरणÓ विषय पर हरदा में हुआ मंथन
रामभाऊ महालगी प्रबोधनी मुंबई के उपाध्यक्ष तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे ने आज हरदा में समृद्ध किसान सुरक्षित पर्यावरण विषय पर आयोजित कार्यक्रम दौरान कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने का कार्य गौरीशंकर मुकाती और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है। वास्तव में हरदा से पर्यावरण के क्षेत्र में जो अलख जगा है इसकी रोशनी सम्पूर्ण देश और विदेशों तक फैलना चाहिए ताकि अन्य लोग इससे प्रेरणा ले सके। इस आयोजन में मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त प्रधान वनसंरक्षक तथा मप्र राज्य बांस मिशन के एमडी डॉ. यूके सुबुद्धि तथा दिल्ली ईकोवेदा क्लाइमेट की डायरेक्टर डॉ. जीशा एमआर सहित संघ के पर्यावरण संरक्षण प्रांत संयोजक शिवशंकर द्वारा भी कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों को आर्थिक रुप से समृद्ध करने एवं पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही भारत को ईमारती काष्ठ के आयातक देशों की सूची से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर बनाने विषय पर मंथन किया गया।
अनोखा तीर, हरदा। ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न खतरे को लेकर आज समूचा विश्व चिंतित है। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश की धरती पर हरदा से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही किसानों की आर्थिक समृद्धि, उनकी भविष्य निधि को सुनिश्चित करते हुए एक तीर से कई निशाने साधने वाली कार्ययोजना को संचालित किया जाना न केवल प्रादेशिक स्तर पर अपितु राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणा का स्त्रोत बन सकती है। जल संरक्षण, मिट्टी कटाव को रोकने, भूजल स्तर ऊपर लाने, लोकल वार्मिंग कम करने, भारत को काष्ठ उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने, नदियों को सदा नीरा बनाने जैसे अनेक कार्यों को सिद्ध करते हुए किसानों को समृद्ध बनाकर भारत को प्रधानमंत्री की मंशा और घोषणा अनुसार शून्य प्रतिशत कार्बन लक्ष्य हासिल करने में महती भूमिका निभाने का कार्य यह कार्ययोजना कर सकती है। इसी विषय को लेकर आज हरदा में हुए मंथन दौरान रामभाऊ महालगी प्रबोधिनी मुंबई के उपाध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सदस्य विनय सहस्त्रबुद्धे ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने उदबोधन दौरान स्पष्ट रुप से कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वृहद कागजी कार्ययोजनाओं को देखा पढ़ा तो काफी है, लेकिन आज प्रत्यक्ष रुप से इसे धरातल पर कैसे चरितार्थ किया जाता है उसे भी देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि रूपई कंपनी के माध्यम से पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाती और उनकी टीम द्वारा जो कार्य किया जा रहा है वह केवल हरदा या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उसकी गूंज पूरे देश और विदेशों तक होना चाहिए। हरदा की इस कार्ययोजना को प्रदेश और देश में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को आकर प्रत्यक्ष देखना चाहिए। बल्कि इसे वृहद प्रशिक्षण केन्द्र के रुप में भी विकसित किया जा सकता है। वास्तव में यहां जो कार्य मैनें देखा है वह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सपनों को साकार करने वाला दिखाई दिया। प्रधानमंत्री ने जी-२० परिषद तथा सीओपी २६ शिखर सम्मेलन जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जो सुझाव प्रस्तुत किए थे तथा कोरोनाकाल दौरान उन्होंने जो सूत्रवाक्य ‘जान भी और जहान भीÓ देते हुए आव्हान किया था वह सब यहां हकीकत में जमीनी स्तर पर कार्यरुप में देखने को मिल रहे है। उन्होंने कहा कि मिशन लाईफ का आव्हान करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यह केवल सरकारी योजना या आयोजन न होकर एक जनआंदोलन बनना चाहिए और आज मैं देख रहा हूं कि गौरीशंकर मुकाती जी के नेतृत्व में इतनी बड़ी तादाद में किसानों द्वारा जो पौधरोपण कार्य किया जा रहा है वह वास्तव में एक जनआंदोलन का स्वरुप ही है। अमृत वन संरक्षण फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम के प्रारंभ में रुपई कंपनी के एमडी ८४ वर्षीय पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाती ने किस तरह किसानों के खेतों की मेढ़ों पर पौधरोपण कार्य किया जाता है और उससे कैसे किसान आर्थिक रुप से समृद्ध हो सकता है उस कार्ययोजना पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी कार्य पद्धति एवं उससे होने वाले लाभ तथा लाभान्वित किसानों से भी रुबरु कराते हुए अपनी बात की प्रमाणिकता को मंच पर सत्यापित किया। आयोजन दौरान मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. यूके सुबुद्धि ने किन प्रजातियों के पौधों में सर्वाधिक कार्बन अवशोषण क्षमता होती है और कौन-कौन सी प्रजातियां तेजी से वृद्धि करते हुए किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है इस विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला। बांस, सागौन की विभिन्न प्रजातियों और इसकी राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर मांग जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्ययोजना शासकीय योजनाओं से पृथक और परिणाममूलक है। इस अवसर पर दिल्ली के ईकोवेदा क्लाइमेट की डायरेक्टर डॉ. जीशा एमआर ने कार्बन क्रेडिट से लाभ प्राप्त करने एवं किसानों को उसका सीधा फायदा कैसे मिल सकता है इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार को इस दिशा में अपनी नीति नियमों और योजनाओं में संशोधन करते हुए इसे इस तरह किसान उपयोगी बनाकर बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है। कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्यभारत प्रांत संयोजक शिवशंकर द्वारा संबोधित करते हुए पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में हमारे दैनिक कार्यों तथा घरेलू आयोजनों के माध्यम से कैसे सुरक्षा की जा सकती है इस विषय पर प्रकाश डाला। आयोजन में मप्र टिम्बर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रविलाल पटेल ने भविष्य में ईमारती काष्ठ की उपयोगिता तथा वर्तमान स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत सर्वाधिक ईमारती लकड़ी आयात करने वाले देशों की सूची में १५वें स्थान पर है। हम सालाना लगभग १० लाख मिलियन क्यूबिक मीटर अर्थात् हमारी आवश्यकता की लगभग ६३ प्रतिशत ईमारती लकड़ी विदेशों से आयात करते हैं। जिस कार्ययोजना के तहत गौरीशंकर जी मुकाती के माध्यम से सागौन का रोपण किया जा रहा है वह एक ओर तो किसानों के लिए लाभ का धंधा है ही, पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम होने के साथ ही वह भारत को ईमारती काष्ठ आयातक देशों की सूची से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इस कार्ययोजना को सम्पूर्ण देश में अपनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में जिन किसानों ने अपने खेतों की मेढ़ों पर पौधरोपण किया है वह तथा जो करने के इच्छुक है वह भी बड़ी तादाद में उपस्थित थे। वहीं खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, सीहोर, देवास, उज्जैन तथा हरदा जिले के किसान, जनप्रतिनिधि, सेवानिवृत्त अधिकारी आदि बड़ी तादाद में उपस्थित थे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार ज्ञानेश चौबे ने तथा आभार प्रदर्शन हर्षित दुगाया द्वारा किया गया।

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