गर्मी के दिनों में पानी के लिए भटक रहे वन्य प्राणी

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

-हर साल बढ़ रही संख्या, सुरक्षा के नहीं हैं इंतजाम
अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में वन्य प्राणियों की संख्या में पिछले 10-15 सालों में तेजी से इजाफा हुआ है। शहर से लेकर गांव तक खेतों में विचरण करने वाले हिरणों की बढ़ती तादाद से किसानों की परेशानी बढ़ी है, लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ठोस उपाय नहीं कर पाया है। इससे ये बड़ी संख्या में खेतों में विचरण करते हुए जहां फसलों को नष्ट करते हैं, वहीं सड़क पार करते समय दुर्घटनाओं का शिकार भी हो जाते हैं। पिछले कुछ समय से इनकी संख्या बढ़ने के साथ ही शिकार करने वाले शिकारी भी क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाली खेतों में हिरणों के झुंड कुलांचे भरते हैं, लेकिन जब खेतों में फसल बोई जाती है तो एक जगह बैठकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को खेतों में चौकीदार और रखवाले बैठाने पड़ते हैं। ग्राम के किसान मधुसूदन भायरे ने बताया कि हिरणों के झुंड और जंगली सुअर खेतों में घूमते रहते हैं। इन्हें भगाने के लिए हर साल लोगों को बैठाना पड़ता है, इसके बाद भी फसलों को नुकसान पहुंच जाता है। फसल उत्पादन में सुरक्षा का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
पुनासा डेम बनने के बाद बढ़ी संख्या
नर्मदा नदी पर बने पुनासा डेम के कारण जंगलों में पानी भरने से बड़ी संख्या में हिरणों के झुंड वहां से निकलकर गांवों की ओर पलायन कर गए। इससे इनकी संख्या तो बढ़ती जा रही है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में ये शिकारियों का शिकार हो रहे हैं। कई बार पानी की तलाश में गांवों में पहुंच जाते हैं, जहां कुत्तों का शिकार बन जाते हैं। वहीं सड़क पार करते समय वाहन दुर्घटनाओं में भी इनकी मौत हो रही है।
सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी अभ्यारण बनाने की मांग
क्षेत्र में वन्य प्राणियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर वन्य प्राणी अभ्यारण बनाने की मांग की है। क्षेत्र के किसान कई वर्षों से इस मांग को लेकर वन विभाग के अधिकारियों को लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे वन्य प्राणियों की सुरक्षा जहां भगवान भरोसे है, वहीं फसलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसानों पर आ गई है। किसानों का कहना है कि बैक वॉटर के कारण जो वन क्षेत्र पानी में डूब चुका है, उसके स्थान पर शासन स्तर पर जिले में नई जगह का चयन कर वन्य प्राणियों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, ताकि न तो ये दुर्घटनाओं का शिकार हों और न ही किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़े।

Views Today: 24

Total Views: 24

Leave a Reply

error: Content is protected !!