अनोखा तीर, सिराली। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिराली के दिव्य शक्ति भवन में होली उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर बताया गया कि होली सिर्फ रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि यह पर्व आत्मा को परमात्म शक्तियों, दिव्य गुणों और श्रेष्ठ संस्कारों से भरपूर करने का संदेश देता है। बीके भव्यता बहन ने होली पर्व के आध्यात्मिक रहस्य को बताते हुए कहा कि होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन केवल लकड़ियां जलाने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे अंदर के अहंकार, इर्ष्या, द्वेष और नकारात्मक वृत्तियों को जलाने का संदेश देता है। होलिका दहन के माध्यम से अपने पुराने संस्कार, दु:ख, शिकायतें और व्यर्थ चिंतन को त्याग देना चाहिए। तभी आत्मा होली अर्थात पवित्र बनती है। उन्होंने कहा कि होली का वास्तविक अर्थ बीती बातों को भूलकर जीवन को आध्यात्मिक और सच्चे रंगों से रंगना है। जीवन में हर रंग का अपना महत्व होता है—लाल रंग शक्ति का, सफेद रंग पवित्रता का, हरा रंग शांति का तथा पीला रंग उमंग और उत्साह का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय कलयुग के अंत अर्थात विश्व परिवर्तन का समय है। इस संदर्भ में होली हमें आत्म परिवर्तन का संदेश देती है। पुराने संस्कारों को जलाकर नए संस्कारों को धारण करना तथा ईश्वरीय संग के रंग में रंगना ही जीवन में सच्ची खुशी का अनुभव कराने वाला मार्ग है।
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