Skip to content
Friday, 23 October 2026
हरदा

मार्च की शुरुआत में ही चुभने लगी धूप

3 min read
Text Size:

-तापमान 38 डिग्री पर पहुंचा
अनोखा तीर, मसनगांव। मार्च की शुरुआत होते ही पारा भी छलांग लगाने लगा है। पिछले आठ दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे सुबह-शाम सर्दी का एहसास हो रहा है, वहीं दोपहर में तीखी धूप चुभने लगी है। दो-तीन दिनों से सुबह हल्की ठंड के बाद दोपहर तक तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। दिन का तापमान बढ़कर करीब 38 डिग्री तक पहुंच गया है, जो पहले लगभग 32 डिग्री हुआ करता था।
तापमान बढ़ने से फसलों पर पड़ने लगा विपरीत असर
तापमान में बढ़ोतरी का असर फसलों पर भी पड़ने लगा है। ग्राम के किसान बाजू लाल छलौत्रे ने बताया कि धूप तेज होने से जमीन की नमी जल्दी समाप्त हो जाती है, जिससे खेतों में खड़ी फसल को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती और फसल जल्दी सूखने लगती है। हालांकि इस वर्ष फरवरी तक सर्दी बने रहने से फसलों में रौनक बनी हुई थी। क्षेत्र में चना और सरसों जैसी फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है। किसानों के अनुसार सरसों-रायड़ा का उत्पादन इस बार सात से 10 बोरा प्रति एकड़ तक निकल रहा है, वहीं चने की फसल का उत्पादन कम होने से किसानों में निराशा है। ग्राम के किसान राकेश रायखेरे ने बताया कि चने की फसल का उत्पादन कम निकल रहा है, जिसका कारण खेतों में अधिक नमी बने रहना है। कई खेतों में फसल में उकठा रोग का प्रकोप भी देखने को मिला है। क्षेत्र में मुख्य रूप से गेहूं, चना, मक्का, सरसों तथा चिया सीड्स की बुवाई हुई थी। लगातार दलहनी फसल का रकबा बढ़ने से खेतों में फंगस तेजी से फैलने लगी है, जिसका असर उत्पादन पर दिखाई दे रहा है।
मौसम अनुकूल होते ही मूंग फसल की बुवाई शुरू
तापमान में वृद्धि के साथ मौसम ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के अनुरूप होने लगा है। इसे देखते हुए क्षेत्र के कुछ किसानों ने मूंग की बुवाई शुरू कर दी है। जिन किसानों के खेतों में चना और सरसों की कटाई हो चुकी है, उन्होंने खेत तैयार कर मूंग की बुवाई कर पानी लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे किसानों को नहर में चल रहे पानी का भी लाभ मिल रहा है। ग्राम के किसान भागीरथ भायरे, रामनिवास रायखेरे, अनिल मायरे आदि ने खड़ी फसल काटकर मूंग की बुवाई कर दी है। अन्य किसान भी गेहूं और चना काटकर मूंग लगाने की तैयारी में हैं। इस वर्ष जल संसाधन विभाग द्वारा नहर में पानी छोड़ने की घोषणा नहीं किए जाने से कुछ किसान असमंजस में हैं, वहीं जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी है, वे ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल लगा रहे हैं।
मूंग के चक्कर में हरी मक्का बेच रहे किसान
ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई के लिए क्षेत्र के कई किसान खेतों में खड़ी हरी मक्का को ही बेच रहे हैं। इस वर्ष कुछ व्यापारियों द्वारा हरी मक्का की खरीदी कर सायलेज तैयार किया जा रहा है। बताया जाता है कि हरी मक्का की समय से कटाई होने पर मूंग की बुवाई समय पर की जा सकती है। जिन किसानों ने खड़ी मक्का बेची है, उनका कहना है कि 250 से 275 रुपये प्रति क्विंटल तक व्यापारियों द्वारा हरी मक्का की खरीदी की जा रही है। एक एकड़ में 150 से 225 क्विंटल तक उत्पादन निकल रहा है। अधिकांश किसान मक्का की फसल को समय से पहले बेचकर मूंग की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

68 Views
What do you think?

Leave a Reply