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Friday, 16 October 2026
हरदा

उच्च न्यायालय के आदेश की अव्हेलना

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-किराये की राशि जमा करने पहुंचे फल-सब्जी विक्रेताओं से नहीं मिले मुख्य नपा अधिकारी
-राशि लेने से किया इंकार
अनोखा तीर, टिमरनी। नगर परिषद टिमरनी द्वारा रहटगांव रोड पर वन विभाग भूमि की सीमा से लगे हाईवे सड़क किनारे छोटी-छोटी गुमटियों पर फल एवं सब्जियों का व्यापार कर रहे व्यवसायियों को गत दिवस 1 लाख रुपये जमा करने एवं 1100 रुपये प्रतिमाह किराया देने का नोटिस दिया गया था। चूंकि सभी छोटे व्यवसायी हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बड़ी राशि जमा करने की नहीं है, इसके बावजूद नगर परिषद द्वारा बार-बार नोटिस देकर राशि जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था तथा जगह से बेदखल करने की धमकी दी जा रही थी। इससे आहत होकर फल-सब्जी विक्रेताओं ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में नगर परिषद के विरुद्ध याचिका दायर की। रीट पिटीशन क्र.7036/2026 के तहत माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए 27 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित किया। आदेश में मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्देशित किया कि नगर परिषद के पारित संकल्प दिनांक से 1100 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से किराया जमा कराया जाए। साथ ही व्यापारियों द्वारा नगर परिषद को बाजार टैक्स के रूप में दुकानवार 20 रुपये प्रतिदिन जो राशि दी जाती है, उसे निर्धारित किराये की राशि में समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापारियों से केवल किराया ही वसूला जाए, इसके अलावा किसी प्रकार का अन्य शुल्क जमा न कराया जाए। इसी आदेश के तहत सभी दुकानदार आवेदन के साथ किराये की राशि जमा करने हेतु नगर परिषद कार्यालय पहुंचे, परंतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की और न्यायालय के आदेश का पालन करने से इंकार कर दिया। दुकानदार उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के साथ प्रतिमाह किराये की राशि जमा करने के लिए आवेदन लेकर पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी द्वारा मुलाकात नहीं करने पर सभी 20 दुकानदारों ने कार्यालय की आवक-जावक शाखा में आवेदन प्रस्तुत कर उसकी रिसीविंग ली।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सीएमओ की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
इस संबंध में फल-सब्जी विक्रेताओं ने पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष जायसवाल से चर्चा की। इसके बाद वे भी व्यापारियों के समर्थन में तथा उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे, लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी टालमटोल करते हुए अपने चेंबर में ही दरवाजा बंद कर बैठे रहे और बाहर खड़े दुकानदारों व कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने नहीं आए। इस घटनाक्रम के बाद सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि जब उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।

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