मोबाइल की लत..

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-बच्चों से जवानों तक सेहत पर भारी पड़ता डिजिटल जहर
-आंखों से लेकर दिमाग और दिल तक कर रहा नुकसान, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
अनोखा तीर, नर्मदापुरम। मोबाइल फोन ने जीवन को जितना आसान बनाया है, उतना ही यह अब सेहत के लिए खतरनाक भी साबित हो रहा है। बच्चों के हाथ में खिलौने की तरह पहुंचा मोबाइल आज युवाओं और जवानों के लिए डिजिटल ज़हर बनता जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल से शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। डॉ.अतुल सेठ ने बताया कि सुबह से रात तक स्क्रीन के सामने जिंदगी है। आज स्थिति यह है कि दिन की शुरुआत मोबाइल अलार्म से होती है और रात का अंत सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए। औसतन एक व्यक्ति 6 से 8 घंटे मोबाइल स्क्रीन देख रहा है। यही आदत धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है।
बच्चों पर सबसे गहरा असर
कम उम्र में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है। डॉ.अतुल सेठा के मुताबिक मोबाइल स्क्रीन बच्चों में नजर कमजोर होना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, भाषा विकास में देरी, चिड़चिड़ापन और जिद, पढ़ाई से दूरी जैसी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। खेल के मैदान की जगह मोबाइल स्क्रीन ने ले ली है, जो भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।
किशोर और युवा मानसिक दबाव में
सोशल मीडिया की दुनिया ने किशोरों और युवाओं पर मानसिक दबाव बढ़ा दिया है। लाइक्स, फॉलोअर्स और तुलना की दौड़ में आत्मविश्वास की कमी, तनाव और बेचैनी, नींद की समस्या अवसाद जैसी स्थिति बन रही है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह डिजिटल एडिक्शन का सीधा परिणाम है।
जवानों में बढ़ रहीं शारीरिक बीमारियां
लगातार झुककर मोबाइल देखने से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और पीठ दर्द आम हो गया है। इसके साथ ही आंखों में जलन और माइग्रेन, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज हृदय रोग का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
नींद और दिमाग पर सीधा हमला
जिला अस्पताल के एमडी डॉक्टर सुनील जैन ने बताया कि मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के हार्मोन को प्रभावित करती है। इसके कारण देर से नींद आना बार-बार नींद टूटना, दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन,अब आम समस्या बन चुकी है।
डॉक्टरों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर मोबाइल उपयोग पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों के मरीज बढ़ेंगे।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज
विशेषज्ञों की सलाह—बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम तय करें। सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल बंद करे, भोजन के समय मोबाइल से दूरी रखें, रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, सप्ताह में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं।

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