परचरी पुराण में दिया भजन मार्ग से ईश्वर प्राप्ति का संदेश

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अनोखा तीर, बालागांव। ग्राम बून्दड़ा में आयोजित संत सिंगाजी महाराज की परचरी पुराण के द्वितीय दिवस में मंडलेश्वर की सुविख्यात कथा प्रवक्ता दीदी चेतना भारती ने भजन और साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य मन, वचन और कर्म के माध्यम से प्रतिदिन अनजाने में पापाचार करता है, लेकिन भजन नहीं करता, जिससे मन और शरीर में अवगुणों की मात्रा बढ़ती जाती है। दीदी चेतना भारती ने कहा कि नित्य प्रतिदिन ईश्वरीय आराधना, भजन, साधना, नाम जप, ध्यान, सात्विक आहार-विहार और संयमित वाणी से सात्विक गुण प्रबल होते हैं, जो तमोगुणों को दबाकर रखते हैं। इसलिए व्यक्ति को निरंतर भजन मार्ग से जुड़े रहना चाहिए। जैसे मनुष्य बिना भोजन, आहार और श्वास के नहीं रह सकता, उसी प्रकार भजन के बिना भी नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैसे तो श्वास-श्वास में हरि स्मरण होना चाहिए, लेकिन यदि यह संभव न हो तो 24 घंटे में से कम से कम एक घंटा प्रभु को पूर्ण तल्लीनता के साथ अवश्य देना चाहिए। उस एक घंटे में सांसारिक कार्यों से विरक्त होकर, संसार से विमुख होकर ईश्वर के सम्मुख उपस्थित होना साधना मार्ग में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। इससे सद्गुणों की वृद्धि होती है और धीरे-धीरे भक्ति का विकास होता है। कथा में उन्होंने कहा कि सतोगुण ही मनुष्य को देवपुरुष बनाते हैं और जीवन को दिव्यता की ओर ले जाते हैं। दीदी चेतना भारती द्वारा भजन मार्ग में उन्नति के लिए बहुमूल्य सूत्र कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को बताए जा रहे हैं। कथा के दौरान दीदी चेतना भारती ने ग्राम बून्दड़ा के आयोजक ग्रामवासियों की तन, मन और धन से सेवा भावना की सराहना करते हुए व्यासपीठ से साधुवाद भी दिया।

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