सोमवार की वीसी में पीसीसीएफ अग्रवाल बोले…..मैं इनका चेहरा नहीं देखना चाहता

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-अनुशासन और प्रशासनिक मर्यादा के चलते पीड़ित आईएफएस ने साधी चुप्पी
गणेश पांडे, भोपाल। जंगल महकमे में 1993 बैच के आईएफएस एवं पीसीसीएफ कैंपा मनोज अग्रवाल हमेशा अपने अमर्यादित भाषा-शैली कई बार विवादों की सुर्खियों में रहें हैं। गत सोमवार को पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अधिकारियों की जमकर क्लास ली। यहां तक कि वीसी में अग्रवाल ने डीएफओ स्तर के अधिकारी को बड़े ही रूखे और उंचे स्वर में कहा,…इसे बाहर करो। मैं इसका चेहरा तक देखना नहीं चाहता। उनके इस लब्ज़ से वीसी में सन्नाटा ख़िच गया। वीसी तो हो गई किन्तु युवा आईएफएस अफसरों में असंतोष है।  दरअसल, हुआ यह कि वीसी में डीएफओ कुछ देरी से पहुंचे। इस बात को लेकर पीसीसीएफ अग्रवाल लाल-पीले हो गए। वीसी में लेट पहुंचे अफसर का चेहरा जैसे ही विंडो पर दिखा वैसे ही अग्रवाल की जुबां से बिगड़ैल बोल निकलने लगे। देरी से पहुंचने का कारण जाने बिना ही उग्र और अमर्यादित भाषा में अग्रवाल बोले कि इसे बाहर करो। मैं इसे देखना नहीं चाहता। यह सुनकर पीड़ित अफसर सबके सामने अपमानित महसूस करने लगे। पीसीसीएफ अग्रवाल के इस व्यवहार से अकेले एक अफसर ही अपमानित नहीं हुआ, बल्कि वीसी में जुड़े अधिकांश अफसरों ने स्वयं को अपमानित महसूस किया। यही वजह रही कि कुछ अफसरों ने खबरनवीस को घटना बताई ताकि भविष्य में होने वाली वीसी में अपमानित करने वाले शब्दों का प्रयोग ना हो। इस पर उच्च स्तरीय रोक लगे।
ऐसे ही अल्फाजों के इस्तेमाल पर संघ से हटाया
पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। जब वे लघु वनोपज संघ में प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर की गैरमौजूदगी एमएफपी पार्क में अधिकारियों-कर्मचारियों की अगस्त 24 को बैठक बुलाई थी। बैठक शुरु होने से पहले ही अपर प्रबंध संचालक के पदस्थ अग्रवाल तब भी अमर्यादित भाषा का उपयोग करने लगे। उनके इसी आचरण पर उन्हें संघ से हटाया गया था। उनके अव्यवहारिक आचरण को लेकर बरखेड़ा पठानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना पटेल और प्रभारी एसडीओ सुनीता अहिरवार, रेंजर प्रियंका बाथम, डॉ.अनिल कुमार को भरी मीटिंग में सबके सामने दुर्व्यवहार किए जाने पर ज्ञापन सौंपा था। इसके पहले भी वो ऐसा कारनामा कर चुके हैं कि अर्चना पटेल को इतना प्रताड़ित किया गया था की वो अस्वस्थ हो गई थी और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा था।अपर मुख्य सचिव को एमएफपी पार्क के अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिखित शिकायत की थी। एसीएस ने तत्कालीन एमडी विभाष ठाकुर से रिपोर्ट मांगी। ठाकुर ने अधिकारी एवं कर्मचारियों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट एसीएस को भेजी और फिर उन्हें वहां से हटाया गया था। एक महीने भी एक बैठक में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर की महिला पर ऐसी टिप्पणी कि अगर वह जवाब देती तो विवाद बढ़ जाता।
मुख्यालय के अफसरों को भी एतराज
वीसी पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल की बदज़ुबानी पर फील्ड के अफसरों को सख्त एतराज है। वैसे मुख्यालय में पदस्थ अपवाद स्वरूप दो-तीन अफसरों को छोड़कर अधिकांश शीर्ष अधिकारियों को भी एतराज है। ऐसे अधिकारियों का कहना है कि उनकी (मनोज अग्रवाल) वीसी शाम सात-साढ़े ७ तक चलती है। ऐसे में डीएफओ उनके बताए प्रशासनिक काम करने का समय नहीं निकाल पाते हैं। इन अफसरों का भी सुझाव है कि वीसी 15 में एक बार होना चाहिए वह भी तब, जब वन बल प्रमुख को वीसी में विशेष रूप से उपस्थित रहें।
मैं इस विषय पर बात करूंगा
इस घटना की जानकारी जब वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े को बताई तो उन्होंने कहा कि इस पर मैं उनसे बात करूंगा। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी भाषा शैली तो शालीन रखनी चाहिए।

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