मां नर्मदा की शरण में जाने से बड़े से बड़ा पापी भी तर जाता है : पं.सौरभ पचौरी

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-नर्मदा महापुराण के समापन में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
अनोखा तीर, करताना। करीबी गांव नौसर में चल रही नर्मदा महापुराण की कथा के सातवें और अंतिम दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में कथा श्रवण किया। कथा का वाचन करते हुए पुराण वाचक पंडित सौरभ पचौरी ने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपरा में नदियों को सदैव माता और देवी स्वरूपा माना गया है। नर्मदा की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि नर्मदा की शरण में जाकर बड़े से बड़ा पापी भी तर जाता है। कथा के दौरान उन्होंने प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश देते हुए कहा कि प्रेम में ही आनंद है और आनंद में ही भगवान का वास होता है। एक-दूसरे से दुर्भाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि भगवान ने सभी को बनाया है। उन्होंने नर्मदा के सभी घाटों का वर्णन करते हुए सत्कर्म करने पर जोर दिया और कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए भगवत कथा का श्रवण और सत्कर्म आवश्यक है। कथा के समापन पर महाआरती एवं महाप्रसादी का वितरण किया गया। अंतिम दिवस कथा श्रवण के लिए टिमरनी से भाजपा नेता सुनील दुबे एवं निशा दुबे पहुंचे, जहां उन्होंने नर्मदा पुराण का पूजन कर पंडित सौरभ पचौरी से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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