अनोखा तीर, प्रतापगढ़ (राजस्थान)। अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रतापगढ़ रामद्वारा में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान गंगा महोत्सव में भक्तों की श्रद्धा उमड़ी। अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठ के परम पूज्य गुरुदेव संत श्री शंभूराम महाराज के मुखारविंद से स्थानीय रामद्वारा में श्रीमद् भागवत कथा हो रही है। रामद्वारा ट्रस्ट के हितेश राजसोनी ने बताया कि संत श्री ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों को भक्तों को श्रवण कराया। संत श्री ने कहा की आत्मा का परमात्मा से मिलन का रास्ता गुरु बताते हैं, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में गुरु अवश्य करना चाहिए एवं शिष्य बनकर पूर्ण रूपेण अपने गुरु की सेवा में समर्पित रहना चाहिए। अग्नि का कार्य है जलाना, चाहे हम उसे जानकर पकड़े या अनजाने में , उसी प्रकार राम नाम साधना भी चाहे जानकर की जाए या अनजाने में उसका लाभ जीव को अवश्य प्राप्त होता है। प्रत्येक जीव का उद्देश्य इस सांसारिक चक्र से मुक्त होकर परमात्मा में विलीन होना है, उसका एकमात्र साधन नाम स्मरण है। संत श्री ने कहा कि मधुर बोली से भी ज्यादा श्रेष्ठ मधुर व्यवहार है। अपने आचरण व अपने कार्यों से मनुष्य को समाज में हमेशा अपनी छवि श्रेष्ठ रखनी चाहिए। मन में सेवा भावना सर्वोपरी रहे। कलयुग में श्रीमद्भागवत का महत्व भक्तों को श्रवण कराया। इसके पूर्व प्रात: 9 बजे भव्य कलश यात्रा श्री दीपनाथ महादेव से प्रारंभ हुई। जिसमें माता बहनों ने चुनरी की साड़ी पहने कलश सर पर धारण किए हुए सनातन धर्म की शोभा बढ़ाई। पुरुष वर्ग सफेद कुर्ता पजामा में एकरूपता का परिचय दे रहे थे। आयोजक व्यास शर्मा परिवार एवं डॉक्टर रावल परिवार श्रीमद्भागवत महापुराण को अपने मस्तक पर धारण करते हुए शोभायात्रा के साथ चल रहे थे। मार्ग में जगह-जगह भक्तों द्वारा शोभा यात्रा का स्वागत एवं श्रीमद् भागवत महापुराण की पूजन अर्चना की गई। रामद्वारा पहुंचने पर भव्य आतिशबाजी के साथ भागवत महापुराण की पूजन अर्चना की गई। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 11.30 से 3.30 बजे तक है। प्रतापगढ़ के अलावा आसपास के कई जिलों से भक्तों का आना स्थानीय रामद्वारा में हो रहा है, जिनका स्वागत एवं अभिनंदन आयोजक परिवार द्वारा किया जा रहा है।

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