अनोखा तीर, हरदा। जिस व्यापारी ने हरदा के व्यक्ति को नकली हीरा 22 लाख में बेच दिया, बाद में जब जांच कराई तो वह नकली पाया गया, व्यापारी ने वह नकली हीरा असली देने का वादा कर वापस भी ले लिया, लेकिन बाद में हीरा देने या राशि देने से मुकर गया। जब हरदा के इस फरियादी ने पुलिस से गुहार लगाई तो पुलिस ने इंदौर के उस हीरा व्यावसाई को पकड़कर ले आई और उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की कार्यवाही भी तत्काल आनन-फानन में कर दी। इस संपूर्ण मामले में सब कुछ सही दिखाई दे रहा है। पुलिस ने अपना काम किया। आरोपी को पकड़ा और उस पर मामला कायम कर जेल भेज दिया, लेकिन इस सारी कार्यवाही में दूसरा पक्ष उस फरियादी का है, जिसने 22 लाख का हीरा खरीदा था, लेकिन उसके हाथ में न तो नकली हीरा लगा और न ही उसे कुछ भी पुलिस ने नगद राशि उस हीरा व्यावसायी से दिलवाई। जब यही बात उसने अपने करणी सैनिक साथियों के साथ थाने जाकर पूछी कि आपने उस आरोपी को रिमांड पर लेकर उसके द्वारा जो धोखाधड़ी की गई है, उस राशि को जब्त क्यों नहीं किया? आपने उस हीरा व्यावसायी को रिमांड पर लेकर यह जानने का प्रयास क्यों नहीं किया कि उसने अपने इस व्यापार में कितने लोगों को नकली हीरा बेचकर धोखाधड़ी की है। यह सवाल पूछना इन करणी सैनिको को भारी पड़ गया। हरदा के इतिहास में आज तक जो काम पुलिस ने नहीं किया था, वह हरदा की सड़कों पर दिखाई दिया। बड़े-बड़े महानगरों में जैसे पुलिस अपराधियों पर लाठियां भांजती हैं, कुछ उसी तर्ज पर इस तरह का लाठी चार्ज हरदा थाने के सामने आज दिखाई दिया। हां इतना जरूर है कि कुछ के शब्द पुलिस वालों के लिए सही नहीं थे, जो उनकी बातें थी, वह इतनी तीखी थी कि पुलिस को चुभना स्वाभाविक था। लेकिन उनके सवाल भी जायज थे। लेकिन पुलिस की जो कार्यवाही तुरत-फुरत हुई और एसडीएम को तत्काल बुलाकर उन करणी सैनिको को जो जेल भेजने की कार्यवाही है, वह कितनी सही है और कितनी गलत है इसका निर्णय हरदा की जनता को ही करना है।





