अब किसानों द्वारा नरवाई जलाने पर भी होगी दण्डात्मक कार्यवाही

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किसानों के खेतों में सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से अब होगी निगरानी

विकास पवार बड़वाह – किसान भाईयो आप अपने खेतों मे फसल अवशेषों की (नरवाई) नही जलाए, बल्कि उसे खेत मे ही मिट्टी पलटने वाले हल से या रोटावेटर से मिलाएं ।ताकि खेत की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो सके। फसल कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों मे आग लगाने से पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित होता है। फसल अवशेषों को जलाने से भूमि में होने वाली रासायनिक क्रियाए भी प्रभावित होती हैं ।जिसके कारण कार्बन व नाइट्रोजन एवं कार्बन और फास्फोरस का अनुपात बिगड़ जाता है । जिससे पौधों को पोषक तत्व ग्रहण करने में कठिनाई होती है।शासन के निर्देशानुसार फसल अवशेषों को जलाने पर दो एकड़ से कम पर 2500 रुपए, दो एकड़ से अधिक व 5 एकड़ से कम पर 5 हजार रुपए तथा 5 एकड़ से अधिक पर 15 हजार रुपए की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।उक्त बात जिला उप संचालक कृषि एस.एस राजपूत ने शनिवार को जनपद पंचायत सभागृह कक्ष में प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक के दौरान कही।

किसानों के खेतों में सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से होगी निगरानी —

 

 

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बी.एस. सेंगर ने बैठक में बताया कि

सेटेलाइट के माध्यम से ब्लॉक स्तर पर नरवाई जलाने वाले किसानों के खेतों में सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से निगरानी की जा रही है ।मतलब अब इन गतिविधियों पर आसमान से नजर रखी जाएगी । टेक्नोलॉजी के दौर में लोग हार्वेस्टर से अपनी फसलों की कटाई करा लेते हैं ।उसके बाद बची हुई नरवाई में आग लगाकर उसे नष्ट करते हैं । जो बेहद हानिकारक साबित होती है। श्री सेंगर ने बताया कि खेत की आग अनियंत्रित होने पर जनहानि,सम्पत्ती व प्राकृतिक वनस्पती, जीव-जन्तु आदि नष्ट हो जाते है। जिससे व्यापक पारिस्थितिक नुकसान होता है।जबकि खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले लाभकारी सुक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते है । जिससे खेत की उर्वरा शक्ति शनैः शनैः घटती है। और उत्पादन भी प्रभावित होता है। खेत मे पडे कचरा, भुसा, डंठल सडने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाउ बनाता है। इन्हे जलाकर नष्ट करना प्राकृतिक खाद्य को नष्ट करना है।

नरवाई ना जलाने के संबंध में ग्रामों में अधिक से अधिक करे प्रचार प्रसार —-

 

एसडीएम सत्यनारायण दर्रे ने बैठक में उपस्थित अमले को निर्देष दिये की नरवाई ना जलाने के संबंध में ग्रामों में अधिक से अधिक दल के माध्यम प्रचार प्रसार करे। प्रचार प्रसार के लिये लिटरेचर, ग्राम के चौकीदार द्वारा डोंडी पिटवाना, किसान संगोष्ठीयों का आयोजन कराना इन सभी गतिविधीयों के फोटो, विडीयों, वरिष्ठ अधिकारीयों को भेजना सुनिश्चित करे। ग्रामों मे सतत निगरानी करे एवं आगामी बुआई तक मैदानी अमले का किसी भी प्रकार का अवकाश मान्य नही होगा। नरवाई जलाने की जानकारी प्राप्त होने पर दल के द्वारा 24 घण्टे के अन्दर मय विडियो, फोटो सहित पंचनामा बनाकर वरिष्ठ अधिकारी को प्रेषितं करे। उक्त बैठक में

तहसीलदार शिवराम कनासे, सनावद तहसीलदार मुकेश मचार, नायब तहसीलदार, समस्त, कृषि विस्तार अधिकारी, समस्त पटवारी, बी.टी.एम., एवं ए.टी.एम. उपस्थित रहे।

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