सीएम को पत्र लिखने के बाद बैकफुट वन विभाग, अब वनरक्षकों से वसूली पर ब्रेक

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गणेश पांडे,भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव को खून से पोस्टकार्ड लिखने के बाद वन विभाग बैकफुट पर आ गया। विभाग ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर 6 हजार 592 फॉरेस्ट गार्ड्स से वेतन से वसूली पर रोक लगा दी है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कमोलिका मोहन्ता ने एक आदेश जारी कर कहा है कि वित्त विभाग द्वारा उनके पत्र दिनांक 30 अगस्त 24 से प्रशिक्षित वनरक्षक का पद सीधी भर्ती का नहीं होने के कारण वेतन का निर्धारण वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 20 अगस्त 2009 के आधार पर न करते हुए, मूलभूत नियम के अनुसार किया जाना नियम संगत होने का लेख किया गया है। वित्त विभाग के पत्र के सन्दर्भ में पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है। अत: वित्त विभाग के निर्देशानुसार 5680/- प्राप्त वनरक्षकों का केवल कार्यालय स्तर पर तुलनात्मक वेतन निर्धारण तैयार किया जाकर परीक्षण किया जावे कि प्रति व्यक्ति कितनी राशि की वसूली संभावित है। जब तक इस कार्यालय से कोई निर्देश न दिया जाए, तब तक वनरक्षकों से वसूली की कार्यवाही नहीं की जाए।होना है 145 करोड़ रुपए ज्यादा की वसूलीवन विभाग ने पहले तो 6 हजार 592 फॉरेस्ट गार्ड्स को सैलरी में 145 करोड़ रुपए ज्यादा दिए। अब इसकी वसूली का निर्णय लिया। यानी हर वनरक्षक को औसतन ढाई लाख रुपए सरकारी खजाने में वापस जमा कराने होंगे। दरअसल, ये स्थिति वनरक्षकों के मूल वेतन पे बैंड के गलत गणना केल्क्यूलेशन से बनी है। भर्ती नियम के मुताबिक पे बैंड 5200 देना था, लेकिन दिए गए 5680 रुपए। ये गड़बड़ी 1 जनवरी 2006 से 8 सितंबर 2014 के बीच भर्ती हुए वनरक्षकों की सैलरी में हुई है।सीएम को खून से लिखा था पोस्टकार्डमप्र कर्मचारी मंच के नेतृत्व में रविवार को वन रक्षकों ने वेतन से अनुचित वसूली के विरोध में मुख्यमंत्री को खून से पोस्टकार्ड लिखकर वसूली आदेश को निरस्त करने की मांग की है। खून से पोस्टकार्ड लिखने वाले वन रक्षकों में नरेंद्र पयासी , अंजनी तिवारी, लव प्रकाश पाराशर, हरि सिंह गुर्जर, प्रेमलाल त्रिपाठी, राकेश वर्मा, नितिन गुप्ता आदि शामिल हैं।

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