पहली बार कमिश्नर ने किया रेंजर को निलंबित

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गणेश पांडे, भोपाल। जंगल महकमे में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक संभाग आयुक्त ने रेंजर के निलंबन का फरमान जारी कर दिया। नियमानुसार तो संभाग आयुक्त रेंजर के निलंबन का प्रस्ताव अपर मुख्य सचिव वन को भेज सकता है। संभाग आयुक्त के निलंबन के बाद वन संरक्षक एवं प्रमोटी आईएफएस मस्तराम बघेल क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे। सवाल उठाने वाले आईएफएस अफसरों का तर्क है कि यदि वन संरक्षक अपने संभाग आयुक्त को ब्रीफ किया होता कमिश्नर की ओर से निलंबन की कार्रवाई रुक जाती। फिलहाल वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव कमिश्नर के निलंबन को लेकर परीक्षण कर रहे हैं और अपनी रिपोर्ट एसीएस को भेजेंगे। संभाग आयुक्त उज्जैन संजय गुप्ता ने नीमच वन मंडल में पदस्थ रेंजर विपुल प्रभात करौरिया को इस बात को लेकर निलंबन आदेश जारी कर दिया कि नीमच में वन विभाग के वर्किंग प्लान में दर्ज 18 हेक्टेयर के लगभग वन भूमि को उद्योग विभाग द्वारा सनलाईट एवं एल्कोलाईट प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी को आवंटित भूमि पर निर्माण कार्य जाकर रुकवा दिया। रेंजर की इस कार्यवाही से एसडीएम और कलेक्टर नाराज हुए और उन्होंने संभाग आयुक्त संजय गुप्ता को रिपोर्ट भेजी कि डीएफओ और रेंजर आवंटित भूमि को वन भूमि बता रहें है, वह राजस्व भूमि है। कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार रेंजर ने निर्माण कार्य रोकने के साथ-साथ कम्पनी के कुछ कर्मचारियों के मोबाईल छिनकर ले गए तथा उनके वाहनों के गाड़ियों की चाबी छिनकर ले गए तथा उनपर जबरदस्ती दबाव बनाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। रेंजर के कृत्य को वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के प्रतिकूल तथा कदाचरण की श्रेणी में आता होने से इनके विरूद्ध म. प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के तहत कठोर दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए निलंबित कर दिया गए।

कहां हुई चूक

रेंजर के निलंबन से यह स्पष्ट हो गया कि संभाग आयुक्त और वन संरक्षक के बीच संबंध में का अभाव है। नीमच डीएफओ ने विवादित भूमि को लेकर वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए अपना प्रतिवेदन वन संरक्षक 31 में को भेज दिया था। वन संरक्षक उज्जैन मस्तराम बघेल ने डीएफओ के प्रतिवेदन को गंभीरता से नहीं लिया और न ही संभाग आयुक्त को वस्त्र स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया। यदि डीएफओ के प्रतिवेदन पर वन संरक्षक ने वस्तु स्थिति से संभाग आयुक्त को अवगत कराया होता तो शायद निलंबन के आदेश में प्रशासनिकत्रुटि नहीं हो पाती।

इनका कहना…

हम कमिश्नर के निलंबन आदेश का परीक्षण करवा रहे हैं। परीक्षण के पश्चात अपर मुख्य सचिव वन को रिपोर्ट भेजेंगे।

असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख

 

प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार संभाग आयुक्त निलंबन की सिफारिश शासन से कर सकता है। निलंबन आदेश जारी करने का अधिकार शासन को है।

मस्तराम बघेल वन संरक्षक उज्जैन

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