जिले में हरदा समेत खिरकिया, टिमरनी, रहटगांव और हंडिया तहसील क्षेत्र में मूंग का कटाई कार्य शुरू हो चुका है। जिसका प्रारंभिक रूझान किसानों को गदगद करने के समान है। क्योंकि, इस बार मूंग की बेहतर पैदावार की बात सामने आई है। इन सबके बीच किसान मूंग के रखरखाव तथा ऊंचे भाव की आस लेकर उसकी क्वालिटी पर फोकस रखे हैं। यही कारण है कि इस साल मजदूरों के जरिये मूंग की हाथों से कटाई करने पर जोर दे रहे हैं।
अनोखा तीर, हरदा। क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल का कटाई कार्य प्रारंभ होने के साथ ही अब रफ्तार पकड़ता दिखाई पड़ रहा है। हालांकि, मूंग की कटाई करीब 15 दिन पहले शुरू हो चुकी है, वहीं हरदा समेत तीनों मंडियों में नई मूंग का आगाज भी हो चुका है। जिसका वर्तमान में किसानों को बेहतर दाम मिल रहा है। यही कारण है कि किसान मूंग की कटाई करने के बाद जहां उसे पूरी तरह साफ-सुथरा व सूखाकर मंडी ले जा रहे हैं, जबकि कई किसानों ने इस साल हार्वेस्टर के बजाय मूंग की थ्रेसिंग पर दांव लगाने का मन बनाया है। फलस्वरूप चारों तरफ चल रहे कटाई कार्य में फिलहाल मामला फिफ्टी-फिफ्टी नजर आ रहा है। इसकी कई वजहें सामने आई हैं, जो किसानों के अलावा पशुपालकों के हितार्थ है। इसी बीच कटाई के प्रारंभिक दौर में मूंग की क्वालिटी के साथ-साथ उसकी पैदावार भी नंबर वन पर है। यही कारण है कि किसानों के चेहरे खुशी से खिलखिलाये नजर आ रहे हैं। दरअसल, दो पूरे महिने की कड़ी मेहनत के फलस्वरूप अपेक्षाकृत उत्पादन हासिल कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि बेहतर उत्पादन के पीछे दो मुख्य कारण यह कि क्षेत्र में उन्नत एवं ज्यादा से ज्यादा उत्पादन देने वाली मूंग की बुआई की थी। दूसरा, मौसम अनुकूल रहने की वजह से कम से कम सिंचाईं में भी मूंग स्वस्थ तथा सेहतमंद रही।
मौसम की मेहरबानी जरूरी
बता दें कि एक तरफ जहां क्षेत्र में मूंग का कटाई कार्य दिनों दिन जोर पकड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर बारिश का मौसम दस्तक देने को बेताव दिख रहा है। इन सबके बीच किसान कटाई के साथ साथ प्रतिदिन प्रार्थना भी कर रहे हैं कि मौसम की मेहरबानी बनी रहे। क्योंकि, ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के हितार्थ ये पखवाड़ा खासा महत्वपूर्ण है।
पिछाती बोवनी पर पर संकट
इन सबके बीच मूंग की बुआई में पिछाते किसानों की फसल पर संकट के बादल लाजमी है। शहरी सीमा से लगे कुछ खेतों में अप्रैल के पहले व दूसरे सप्ताह में बुआई की थी, जो फिलहाल फूल की प्रक्रिया से उतरकर फली की ओर अग्रसर है। उधर, कुछ गांवों में बोवनी इससे भी लेट हुई है। अब चिंता यह कि समय पर कटाई की चुनौती है।
किसानों का क्वालिटी पर फोकस
मूंग की फसल को थे्रसर से निकालने की प्रक्रिया के पीछे किसानों का उद्देश्य यह है कि में दाना साफ-सुथरा निकल रहा है। वहीं, मूंग विक्रय में लेटलतीफी के बीच उसका रखरखाव यानि सुरक्षित स्टॉक एवं फसल बेचते समय दूसरी ट्रालियों की तुलना में उसका भाव ऊंचाई पर तय है। यही कारण है कि अच्छी पैदावार के बाद अब किसान क्वालिटी पर खासा ध्यान दे रहे हैं। तीसरा व सबसे जरूरी मजदूरों के जरिये खेत के कोने-कोने तथा हवा-पानी में जमीदोंश पौधों को भी काटकर उठा लिया जाता है। वहीं थ्रेसिंग की प्रक्रिया में हरा-भरा भूसा मानों पूरी मेहनत का बोनस है, जो कि इस बार भूसे की कमी के मध्य किसानों की जरूरत को पूरा भी करेगा।

