पालने में झूले श्रीराम लला… -पट्टाभिराम मंदिर में हर्षोल्लास से मना राम जन्मोत्सव

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अनोखा तीर, हरदा। बुधवार को श्रीराम जन्मोत्सव शहर में हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। रामनवमी पर्व को लेकर मंदिरों समेत घरों में पहले से ही सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई थी। शहर के गढ़ीपुरा में स्थित पट्टाभिराम मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। राजस्थानी शैली में बने इस प्राचीन मंदिर में नारदीय परंपरा के हरी कीर्तन कर रामलला के जन्म से लेकर वनवास और फिर राज्याभिषेक तक की कथा का सजीव चित्रण किया गया। महाराष्ट्र के नागपुर से आई भजन गायिका डॉ.स्मिता अलोणी ने नारदीय शैली में भगवान के रामजन्मोत्सव के विषय में बताया। इस दौरान मौजूद भक्तों ने भगवान राम के जयकारों लगाएं। ठीक 12 बजे भगवान राम का जन्म हुआ, तब भक्तों ने प्रभु राम के जयकारे लगाकर राम जन्म की स्तुति की गई। घड़ी के कांटे के ठीक बारह बजे पर आने के साथ ही मंदिर के पट खुलने के भक्तों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए ओर भगवान के बाल रूप के दर्शन किए। मंदिर के पुजारियों ने भगवान के बाल रूप को ले जाकर माता कौशल्या के रूप में बैठी महिला की गोदी में दे दिया। इसके बाद उन्हें फूलों के पालने पर विराजमान किया गया। इस दौरान जन्मोत्सव में शामिल भक्तों के द्वारा भगवान के बाल रूप को फूलों से सजे पालने में झूला झूला कर जन्मोत्सव का आनंद लिया। इसके बाद प्रसादी वितरित की गई। रामजन्मोत्सव में शामिल होने भक्त इंदौर, भोपाल के साथ महाराष्ट्र से भी हर साल यहां आते हैं। इस दौरान राम जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की कथा का वर्णन किया गया। नारदीय परंपरा में कीर्तन गद्य व पद्य दोनों में होता है। इसमें भगवान रामचन्द्र जी जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की कथा को पहले गद्य फिर उसका हिंदी अनुवाद कर कीर्तन में किया गया। इस प्राचीन परंपरा के कीर्तनकार बहुत कम बचे हैं। मंदिर समिति के सदस्य दिलीप गोड़बोले के मुताबिक नारदीय परंपरा भजन की विशेष शैली होती है। इसमें कथा कहते हुए उसे पद्य में गाया जाता है। उन्होंने बताया कि पट्टाभिराम मंदिर में राम नवमी के अवसर पर रामजन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया है।

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