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Saturday, 31 October 2026
हरदा

आखिरकार नरेंद्र नागर पर क्यों मेहरबान है संस्करण केंद्र के अफसर

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गणेश पांडे, भोपाल। राज्य लघु वनोपज संघ की इकाई विंध्या हर्बल्स बरखेड़ा पठानी के सीईओ प्रफुल्ल फुलझले से लेकर प्रबंधक तक उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। पिछले एक दशक से एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी में कंस्ट्रक्शन, फेब्रिकेशन, पुताई कार्य से लेकर दवाइयां के रॉ मैटेरियल प्रदाय करने का ठेका तक वर्क आर्डर नरेंद्र नगर को दिया जाता है। जबकि उनके मूल काम कंस्ट्रक्शन का है। नरेंद्र नागर कंस्ट्रक्शन को बिना टेंडर कोटेशनों के आधार पर लाखों रुपए के कार्य दिए जा रहे हैं। वर्तमान में उनके द्वारा मेंटेनेंस का कार्य किया गया है, जो कि लगभग 30 से 35 लाख रुपए का हो चुका है। केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालिक अधिकारी प्रफुल्ल फुलजले और उत्पादन प्रबंधन श्रीमती सुनीता अहिरवार द्वारा 20 प्रतिशत कमीशन पर उन्हें काम दे रहे हैं। हद तो तब है जब विंध्या हर्बल में कंस्ट्रक्शन वर्क पुताई का कार्य हो या फिर फेब्रिकेशन के कार्य अन्य कोई भी एजेंसी करें लेकिन बिल नागर के फर्मो के नाम पर ही बनता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कैलाश रघुवंशी की होती है।

आर्यन फार्मेसी का एकाधिकार

पिछले एक दशक में एमएसपी पार्क में आर्यन फार्मेसी अथवा सिस्टर कंसर्न का एकाधिकार रहा है। दवाइयों को बनाने के लिए जो भी संबंधित रॉ मटेरियल खरीदे जाते हैं, उसमें 70 से 80 प्रतिशत रॉ मैटेरियल आर्यन फार्मेसी के ही होते हैं। हालांकि फेडरेशन के एमडी ठाकुर दावा कर रहे हैं कि वह व्यवस्था को बदलने में जुटे हैं। यानी उनके अनुसार अब भविष्य में गड़बड़ियों की गुंजाइश बहुत कम रहेगी। बावजूद इसके, जांच के नाम पर फेडरेशन के एमडी को सिर्फ खाली गुमराह किया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि जांच के दायरे में आने वाले अधिकारियों का दावा करते है कि उच्च अधिकारियों को लिफाफा प्रदान करके आ गए हैं अब आगे कोई कार्यवाही नहीं होगी।

फुलझले और अहिरवार पर कंसोटिया की विशेष कृपा

सूत्रों ने बताया कि दोनों ही अधिकारियों पर अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया की विशेष मेहरबानी है। यही वजह है कि लघु वनों पर संघ के एमडी विभाष ठाकुर हो या फिर अपर प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल दोनों ही अधिकारियों के जांच आदेश प्रसंस्करण केंद्र में पहुंचते ही डस्टबिन में डाल दिए जाते हैं। एमएसपी पार्क के कर्मचारियों की माने तो सुनीता अहिरवार पर अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया की विशेष कृपा होने की वजह से कोई भी जांच शुरू नहीं हो पा रही है। यही नहीं, गड़बड़ियों पर लीपापोती तेजी से शुरू हो गई है। पिछले दिनों अनावश्यक रूप से खरीदे गए रॉ मैटेरियल को उस समय रातों-रात शिफ्ट कर दिया गया, जब संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने गोदाम के भौतिक सत्यापन की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए उन्होंने बकायदा समिति भी गठित की थी। हालांकि समिति के सदस्य डॉक्टर संजय शर्मा को लेकर सवाल उठ रहे थे। डॉ.शर्मा गड़बड़झाले के संदेह के दायरे में आते हैं।

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