यह बात गलत है

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आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर के खंडवा बायपास स्थित एक निजी छात्रावास के बाहर से लगा हैंडपंप है। जो बीतें कई महिनों से सुधार कार्य की बांट जोह रहा है। लेकिन समय के मान से अब ये हैंडपंप अनदेखी का शिकार है। क्योंकि स्थानीय लोगों को इसके सुधार अथवा मरम्मत कार्य की सारी म्मीदें टूट चुकी हैं। इतना ही नही, हैंडपंप का बचा हुआ हिस्सा बुरी तरह जर्जर हो चला है। यही हाल अन्य इलाकों में भी देखने को मिल जाएगा। जहां पेयजल सुविधा की दृष्टि से लगे हैंडपंप चालू होने के बजाय शोपीस बनकर खड़े हैं। इसी तरह इन्दौर रोड पर कलेक्टर निवास से कुछ कदम आगे वन विभाग की जांच चौकी के पास स्थित हैंडपंप वेंटिलेटर पर है। जबकि यही हैंडपंप एक समय में इलाके का सबसे बेहतर जलस्त्रोत बनकर उभरा था, जो आसपास के लोगों के अलावा राहगिरों की प्यास बुझाने में सहायक रहा। लेकिन इसके कुछ साल बाद जब साइड़ में नाले का निर्माण हुआ तो हैंडपंप मिट्टी में दबता चला गया। फलस्वरूप यहां केवल हैंडपंप का ऊपरी हिस्सा दिखाई दे रहा है। इस बारे में स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उसी समय पाइप बढ़ाकर हैंडपंप को ऊंचा कर सकते थे, वर्तमान में वही विकल्प खुला हुआ है। ऐसा इसलिये, क्योंकि बेहतर जलस्त्रोत का संरक्षण जरूरी है। वह भी तब , जब सामने गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है।

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