कश्मीर की तरह रिजगांव के खेत में लहरा रही केसर की फसल

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प्रदीप साहू, खातेगांव। कश्मीर की सुनहरी घाटियों में लेक लद्दाख की पहाड़ियों में केसर की खेती का हमने सुना और देखा था। लेकिन कश्मीर की तरह ग्राम रिजगांव के खेत में लहरा रही केसर की फसल को देखकर खेत में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हम कश्मीर के खेत में हैं। हमारी टीम आज खातेगांव तहसील क्षेत्र के ग्राम रिजगांव में पवन मंगल के खेत में पहुंची। जहां केसर की फसल लहरा रही थी। हमने जब कृषक पवन मंगल से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि नित्य नई-नई टेक्नोलॉजी के साथ वर्तमान दौर में खेती को किस प्रकार लाभ का धंधा बनाया जाए जिस पर सरकार काम कर रही है। इस योजना के तहत वर्तमान समय में गूगल यूट्यूब पर केसर की खेती को दिखा फिर एक बार मंदसौर की मंडी में पहुंचे तो वहां पर अमेरिकन केसर की खेती करने वाले कुछ कृषक मिले और उनसे केसर की खेती को लेकर चर्चाएं की गई तो उन्होंने बताया कि हम लोग अमेरिकन केसर की खेती कर रहे हैं। यह खेती लाभ की खेती है, इसका बीज दस हजार रुपए किलो मिलता है। लेकिन उत्पादन अधिक होता है। मौसम कैसा भी हो यह फसल खेतों में लहराती है। मंदसौर मंडी में मिले किसान भाइयों ने हमें 2 किलो केसर के बीज उपलब्ध कराया। करीब दो एकड़ भूमि में दीपावली के बाद केसर की फसल लगाई और अब लगभग लगभग फसल तैयार हो रही है। केसर के फूल खिलने लगे हैं। हमारी टीम को पवन मंगल ने बताया कि केसर के साथ-साथ केसर की पंखुड़ियां के नीचे जो डोडा लगा रहता है उसमें केसर के बीज रहते हैं वह भी बिकते हैं। केसर के साथ उसके बीज भी बिकते हैं। इसलिए यह नई खेती है। मैं बचपन से ही खेती का कार्य करता हूं इसलिए मुझे नई तकनीक से खेती करने में आनंद महसूस होता है। इसलिए मैंने इस बार अपनी दो एकड़ भूमि पर केसर की खेती की है। इस महीने के अंत तक यह केसर की फसल पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगी। इसे अमेरिकन केसर कहते हैं। जिसकी खुशबू बहुत ही श्रेष्ठ है। किसान पवन मंगल ने किसान भाइयों से अपील की है कि बदलते इस दौर में कुछ हटकर हम किसानों को करना चाहिए। जिससे खेती लाभ का धंधा सिद्ध हो। मैंने केसर की फसल लगाई है आप भी मेरे खेत का अवलोकन कर देखें और केसर की खेती करें।

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