कैग की ऑडिट रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेते शासकीय विभाग

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गणेश पांडे, भोपाल। लाखों-करोड़ों रुपया खर्च कर नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) कड़ी मशक्कत और गंभीर निरीक्षण के बाद ऑडिट रिपोर्ट तैयार करता है। इन ऑडिट रिपोर्ट में सरकारी योजनाओं को क्रियान्वयन में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता को उजागर कर एक्शन-टेकन के लिए रिपोर्ट विभागों को भेजता है किंतु अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभाग प्रमुख कैग की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं ले रहें हैं। नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने अपने ताजा रिपोर्ट में इस आशय के संकेत दिए हैं। कैग के प्रतिवेदन में साफ तौर पर कहा है कि विभाग द्वारा एक्शन-टेकन रिपोर्ट 6 सप्ताह में प्रस्तुत करना चाहिए किंतु ऐसा नहीं हो रहा है। हाल ही में विधानसभा में प्रस्तुत प्रतिवेदन में सबसे अधिक कंडिकाएं नगरीय विकास एवं आवास, लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की लंबित है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 वर्षों में 17 डिपार्टमेंट में 18186 कंडिकाएं लंबित है। इनमें से सबसे अधिक नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 9426, लोक निर्माण में 2939 और वन विभाग में 2609 कंडिकाएं लंबित है। कैग ने अपने प्रतिवेदन प्रशासनिक विभागों से अपेक्षा की है कि लेखा परीक्षा प्रतिवेदनों में सम्मिलित खड़काओ और निष्पादन लेखा परीक्षा के विधानसभा में प्रस्तुति के 3 महीने के भीतर विधिवत रूप से आडिट आपत्तियों के उत्तर दी जानी चाहिए। दिलचस्प पहलू यह है कि वन विभाग में जून 2016 और लोक निर्माण विभाग में दिसंबर 2021 से उत्तर लंबित है। इन दोनों विभागों ने कैग की कंडिकाओं को गंभीरता से नहीं लिया है। कैग ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में ही वन विभाग की कई गड़बड़ियों को उजागर किया है। मसलन, वन विभाग ने आपात्र से गतिविधियों पर अनियमित रूप से 53.29 करोड़ और सागौन के रोपण में 29.58 करोड़ रूपया का अनियमित व्यय किया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह आशंका जताई है कि ऑडिट रिपोर्ट और लेखा परीक्षा की कंडिकाओं पर कार्यवाही के अभाव में गंभीर वित्तीय अनिमितताओं के जारी रहने का जोखिम बना रहता है।

सबसे अधिक इन विभागों में लंबित है कंडिकाएं

विभाग लंबित कंडिकाएं

नगरीय विकास एवं आवास 9426

लोक निर्माण 2939

वन विभाग 2609

वित्त विभाग 854

पीएचई 850

संस्कृति 460

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