एक चौथाई बसें निर्धारित मापदंडो पर सटीक नही
मुख्यालय से इन्दौर, खंडवा और बैतूल-नागपुर समेत अन्य रूटों पर चलने वाली यात्री बसों के ऑपरेटर शासन द्वारा तय मापदंडों पर खरा उतरने में गुरेज करते हैं। जबकि जिला प्रशासन की अगुवाई में कई दफा मीटिंगों का दौर हुआ, वहीं नियमों का पाठ पढ़ाने के साथ ही उनके पालन की उम्मीद जताई जाती रही। परंतु हर बार कमियां उजागर हुई हैं। वहीं दूसरी ओर मौसमी कार्रवाई के मध्य सड़कों पर परिवहन नियमों का उल्लंघन व मनमानियों का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है। इस बीच यात्रियों को तय सुविधाओं से मोहताज रहना पड़ता है।
अनोखा तीर, हरदा। जिले में परिवहन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते यात्री बसों के साथ ही हेवी वाहनों की मनमानी थमने का नाम नही ले रही है। जबकि मुख्यालय से इन्दौर, खंडवा, होशंगबाद, सिहोर और बैतूल-नागपुर से सीधे कनेक्टिविटी है। जागरूक नागरिकों के मुताबिक एहतियातन हरदा में परिवहन नियमों की पाठशाला नितांत आवश्यक है, ताकि बेलगाम वाहनों के साथ साथ नियमों की अनदेखी करने वालों को पाठ पढ़ाया जा सके। परंतु , विडंबना ही कहेंगे जो यहां रूटीन कार्रवाई पर फोकस रहता है। इन सबके बीच आमजन को रियायत दर पर यात्रा, यात्री बसों में सुविधाओं का विस्तार तथा सारे यात्री वाहन मापदंड पर खरे हैं या नही ? इसकी सघन जांच जरूरी है। उन्होंनें यह भी कहा कि बीतें एक दशक पर रोशनी डाले तो जनता के मुखर होने पर हर बार प्रशासन को संज्ञान लेना पड़ा, तब कहीं परिवहन अमले की मौजूदगी का आभास हुआ है। खासकर प्रमुख तीज-त्यौहार समेत अन्य विशेष अवसर तथा दुर्घटनाओं के बाद देखने को मिलेगा। उसके बाद फिर से सारी व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौट जाती है, जो अगले अभियान तक बदस्तूर जारी रहता है। इन्हीं मनमानियों के मध्य लोगों को असुविधाओं के बीच सफर करना पड़ता है। यह भी उल्लेखनीय है कि यात्री बसों के ऑपरेटर खुद आगे आकर नियमों को आत्मसात नही करते हैं। इस राह में क्या अड़चन हैं ? यह संबंधित ऑपरेटर व परिवहन अमला ही जाने। क्योंकि, बार-बार नियमों का पाठ पढ़ाने के बावजूद उन पर अमल नही होना विचारणीय है। हालांकि, हर एक बस ऑपरेटर ऐसा नही करता है। बता दें कि मुख्यालय से दिनभर में सभी बड़े-छोटे रूटों पर करीब डेढ़ सौ बसों का आना-जाना होता।
फर्राटे भर रही कंडम बसें
प्राप्त जानकारी के अनुसार यात्री बसों के बीच कई कंडम बसें भी फर्राटे भर रही हैं। खासकर हरदा से छोटे रूटों पर चलने वाली बसों की हालत खराब है। बावजूद उन्हें सड़क पर दौड़ाया जा रहा है। जबकि ऐसी बसों का सड़क पर भर्राटे भरना दुर्घटना की संभावनाओं को बल देते हैं। जिनकी जांच कर फिटनेस हित अन्य मापदंडों की जांच आवश्यक है।
फ्रंट पर दस्तावेज नगण्य
यह भी देखने को मिलेगा कि बसों में विंड स्क्रीन पर फिटनेस और परमिट की प्रतिलिपि नहीं लगाते हैं। हालांकि बड़े रूट की बसें यह दस्तावेज साथ रखते हैं। परंतु समय आने पर उन्हें प्रस्तुत करते हैं। जबकि नियमानुसार इन दोनों दस्तावेज के साथ किराया सूची भी चस्पा की जानी चाहिए। ताकि यात्रियों को निर्धारित किराए की जानकारी रहे। लेकिन, ये सब नदारद रहता है।
यात्री से ज्यादा लगेज पर जोर
यहां बताना होगा कि इन दिनों यात्री बसों का फोकस यात्रियों से ज्यादा लगेज पर रहता है। क्योंकि, इससे बस ऑपरेटर एक तीर से दो निशाने लगाता है। परंतु क्षमता की दृष्टि से देखें तो यह नियमों के विपरीत है। वहीं बस में सवार यात्रियों की जान से खिलवाड़ के समान है। क्योंकि क्षमता से अधिक या यूं कहें कि दो तरह की लोड़ के कारण बस अनियंत्रित होने की आशंकाओं को बल मिलता है। जबकि, इसी मामले में जानकारों के मुताबिक ऐसी स्थिति में मालवाहक वाहन के नियमों का पालन आवश्यक है। लेकिन इन सब बातों को दरकिनार कर अपने मंसूबो को अंजाम दिया जा रहा है। खासकर नाईट में चलने वाली गाड़ियों में लगेज की क्षमता को मापने की दरकार है।
यह नियम जरूरी
– निर्धारित दर पर किराया वसूली
– बस में परमिट, फिटनेस, किराया सूची
– ड्रायवर-कंडक्टर ड्रेसकोड का पालन करें
– आगजनी से निपटने अग्निशमक यंत्र
– इमरजेंसी के लिए आपात खिड़की
– फर्स्ट एड बाक्स की अनिवार्यता
यह बेहद जरूरी
– आपात खिड़की नियमित खोलें व बंद करेंं
– स्टॉप अग्निशमक यंत्र का इस्तेमाल सीखें
– रूट की किराया सूची लगाएं जो सबको दिखे

