श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया भगवान महावीर स्वामी का 2550वां निर्वाण महोत्सव

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नगर के जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने चढ़ाए निर्वाण लाडू, भक्तिभाव से की भगवान महावीर की पूजा

हरदा। नगर के जैन मंदिरों में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर का 2550वां निर्वाण महोत्सव श्रद्धाभक्ति के साथ मनाया गया। दिगम्बर एवं श्वेताम्बर धर्मावलंबियों ने भगवान महावीर के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर 108 कलशाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। मंदिरों में जयकारों के साथ भगवान महावीर निर्वाण दिवस पर निर्वाण लाडू अर्पित किए। मंदिरों में अष्ट द्रव्यों से पूजा-अर्चना कर भगवान के जयकारों के साथ महावीराष्टक का उच्चारण कर निर्वाण अर्पित किए।

दिगम्बर जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव रविंद्र जैन ने बताया कि भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर होकर अंतिम तीर्थंकर हैं। महावीर स्वामी ने कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन ही स्वाति नक्षत्र में कैवल्य ज्ञान प्राप्त करके निर्वाण प्राप्त किया था। जैन धर्म में धन-यश तथा वैभव लक्ष्मी के बजाय वैराग्य लक्ष्मी प्राप्ति पर बल दिया गया है। प्रतिवर्ष आज के दिन जैन धर्मावलम्बीयों द्वारा दीपमालिका सजाकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाणोत्सव मनाया जाता है।

समाज के मंत्री राहुल गंगवाल ने बताया कि बड़े दिगम्बर जैन मंदिर में प्रात:काल भगवान महावीर स्वामी का 108 कलशों के साथ 64 रिद्धि सिद्धि मंत्रों से अभिषेक किया जिसमें भगवान महावीर स्वामी के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अजय कठनेरा परिवार को प्राप्त हुआ तथा प्रथम शांतिधारा एवं निर्वाण लाडू का सौभाग्य अंकित पवन सिंघई परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा तथा निर्वाण लाडू का सौभाग्य प्रथम अनूप बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात भगवान महावीर स्वामी की हर्षोल्लास से पूजन कर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस अवसर पर जैन धर्मावलंबियों ने नगर के सभी मंदिरों में पहुंचकर निर्माण लाडू चढ़ाएं और समाज जनों को भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव की बधाइयां दी । उल्लेखनीय है कि जैन धर्म परम्परा में आज ने नव वर्ष वीर निर्वाण संवत शुरू होता है।

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