दीपावली पर हीरे-जवाहरात और नगदी से सजेगा महालक्ष्मी का दरबार

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दीपावली का त्यौहार नजदीक आते ही हर तरफ रौनक और उल्लास छाने लगता है। इस समय लक्ष्मी मंदिरों का विशेष तौर पर कायाकल्प होता है और इन्हें रंग-बिरंगी लाइटों की रोशनी से सजाया जाता है। सजावट के इस मामले में रियासत काल के दौरान बनाया गया रतलाम के माणक चौक में स्थित महालक्ष्मी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर में हर साल सोने चांदी के आभूषणों और नगदी से सजावट की जाती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां अपने नगदी और आभूषण सजावट के लिए देकर जाते हैं और इन्हें सजाने के बाद व्यक्ति को वापस लौटा दिया जाता है।

इस बार सामग्री लिए जाने की तारीख निर्धारित की गई थी लेकिन लगातार आ रहे भक्तों को देखते हुए अब सामग्री ली जाएगी। इस मंदिर में भारी संख्या में सोना-चांदी के आभूषणों और नगदी से सजावट की जाती है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। माता के मंदिर के श्रृंगार के लिए आसपास मौजूद थांदला, रावटी, पीथमपुर समेत गुजरात के दाहोद इलाके से भी भक्त सामग्री पहुंचाते हैं।

नोटों से सजता है मंदिर

महालक्ष्मी का यह मंदिर दीपावली के मौके पर पूरी तरह से अलग-अलग रंगों के नोटों से सजाया जाता है। इन नोटों को कुछ इस तरह से लगाया जाता है जैसे फूलों की लड़ियां लगा दी गई है। देखने में यह नजारा काफी आकर्षक होता है और माता लक्ष्मी के दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में भक्त यहां पर पहुंचते हैं। वर्ष भर में एक बार दीपावली के मौके पर मंदिर में यह श्रृंगार होता है जिसका भक्तों के बीच खासा उत्साह देखा जाता है।

120 घंटे तक दर्शन

मंदिर की सजावट होने के बाद धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाते हैं। उसके बाद यह दर्शन लगभग 120 घंटे तक खुले रहते हैं। पांच दिवसीय दीपोत्सव के तहत हीरे मोती, आभूषण, सोने चांदी, नगदी से की गई यह सजावट भाई दूज तक रहती है। जो श्रद्धालु यहां पर सामग्री देकर जाते हैं उन्हें टोकन दिया जाता है और फिर टोकन के आधार पर उन्हें उनका सामान या नगदी लौटा दी जाती है।

मंदिर की मान्यता

रतलाम का यह महालक्ष्मी मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है और यहां से कई मान्यताएं भी जुड़ी है। यहां दीपावली के मौके पर मंदिर में जो विशेष सजावट की जाती है उसके बारे में लोगों का मानना है कि जो लोग यहां पर सजावट के लिए सामग्री देकर जाते हैं उनके घर में वर्ष भर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस मंदिर से मिलने वाली कुबेर की पोटली का भी भक्तों के बीच खास महत्व है। इस पोटली में सुपारी, सिक्का, सीपी, कमलगट्टा समेत अन्य सामग्री रहती है। मान्यताओं के मुताबिक अगर इस घर की तिजोरी में रखा जाता है सुख समृद्धि बनी रहती है।

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