आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह मुख्यालय स्थित शासकीय जिला अस्पताल में अचानक आगजनी की घटना दौरान उस पर काबू पाने के उद्देश्य से बाल्टियों में रेत भरकर रखी जाती है। यहां पर भी बकायदा रेत भरकर बाल्टियां मौजूद हैं। परंतु बाल्टियां रखकर प्रबंधन इनकी सुध लेना मानो भूल सा जाता है। जिसके चलते यही बाल्टियां लोगों के लिये पिकदान में तब्दील हो जाती हैं, वहीं अन्य स्थानों पर रेत रखे-रखे पत्थर हो जाती है। ऐसे में अप्रिय घटना दौरान ये इंतजामात फेल साबित होने की आशंकाएं लाजमी है। इतना ही नही, यहां आने-जाने वाले लोगों के बीच ये मामला चर्चा में रहता है। इसकी मुख्य वजह रेत भरी बाल्टियों का बुरा हाल तथा लोगों को बेहिचक थूकते भी देख चुके हैं। ऐसी स्थिति में इनके रखरखाव को लेकर थोड़े बदलाव लाजमी हैं। इस संबंध में जागरूक युवाओं का कहना है कि बढ़ती आग को रोकने के लिये पानी के साथ साथ रेत को उपयुक्त माना गया है, जो कि आपात हालात में सबसे पहला कदम है। ऐसे में इन इंतजामों को चुस्त-दुरूस्त रखने की दरकार है। यहां रखी बाल्टियों की ऊंचाई बढ़ाने से कोई भी इसे पिकदान के तौर पर इस्तेमाल नही कर सकेगा। इसके अलावा हर महिने दो महिने में रेत बदलना सुरक्षा के हितार्थ रहेगा। अन्यथा इन सबके अभाव में वही लोगों का दो टूक कह देना जारी रहेगा, कि यह बात गलत है।

