कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार  

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अनोखा तीर, हरदा। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय, हरदा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सेमिनार के द्वितीय दिवस की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता बिले ने अपने वक्तव्य में उपस्थित अतिथियों, मुख्य वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रशासनिक अधिकारी वीके विछोतिया ने द्वितीय दिवस की रूपरेखा की विस्तृत जानकारी दी। द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में डॉ. मेधा भुस्कुटे, प्राध्यापक एवं कंसलटेंट, भाभा कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस, भोपाल उपस्थित रहीं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व एवं उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए मानव जीवन में इसकी भूमिका, अटल टिंकरिंग लैब, एथिक्स, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था में उपयोग, नीति निर्माण, मूल्यांकन प्रक्रिया, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शोध कार्य में इसके प्रयोग, ब्लूम टैक्सोनॉमी पर आधारित एआई टैक्सोनॉमी, थ्री-डी प्रिंटिंग, सतत विकास तथा समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर सारगर्भित जानकारी दी। द्वितीय मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में मैनिट भोपाल से आमंत्रित डॉ. दीपक कुमार, सहायक प्राध्यापक, मेकेनिकल विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विकास यात्रा, इसके प्रकार एवं अर्थ पर जानकारी दी। उन्होंने दैनिक जीवन में एआई की उपयोगिता, कृत्रिम मानव मस्तिष्क की अवधारणा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग एवं कृषि क्षेत्र में सजगता के साथ इसके उपयोग पर जोर दिया। साथ ही फेक न्यूज एवं निजता उल्लंघन जैसे अनैतिक उपयोग के खतरों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। सेमिनार के प्रथम दिवस में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में भोपाल से डॉ. सचिन तिवारी तथा भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली से डॉ. पूर्णेंदु विकास देवनाथ उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सेमिनार में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया, जिनमें से 240 से अधिक प्रतिभागियों ने दोनों दिवस सक्रिय सहभागिता की। तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों द्वारा लगभग 50 से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षाविद, शोधार्थी, हरदा जिले के महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक एवं पत्रकार उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त स्टाफ एवं कार्यक्रम समिति के सदस्य डॉ. यशवंत अलावा, रवि व्यास, डॉ. रीना मालवीय, डॉ. परिधि कनौजिया, मनीषा चौहान, आयुषी सिसोदिया, डॉ. आशा गायकवाड़, डॉ. प्रियंका राय, गुंजन सोलंकी, भावना अग्रवाल, सविता शुक्ला, डॉ. प्रतिष्ठा कुमेकर, डॉ. अंजलि गुप्ता, डॉ. शिवानी बर्मन, सुमित शर्मा, आर के बिल्लोरे, डॉ. राहुल सराठे, डॉ. रविंद्र सोनपुरे, डॉ. चंद्रकिशोर लोखंडे, डॉ. अशोक पवार, डॉ. बलवान पवार, डॉ. सवेंद्र पटेल, राजेश दीक्षित, के एल मालवीय, हरिहर लाभानिया, डॉ. योगेश गौर, दिलीप ढोके, पुष्पेंद्र राजपूत, मनोज मालवीय, भगवती तिवारी, डॉ. मोहनलाल सूर्यवंशी, सुनिल, गजेंद्र, दिनेश गौर, आकाश, संजय, ओम भावसार, संतोष, अर्जुन, लक्ष्मी बाई, राजा सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे। महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक लोकनृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। समापन समारोह में राष्ट्रीय सेमिनार की विस्तृत रिपोर्ट संयोजक डॉ. राकेश सिंह परस्ते ने प्रस्तुत की। समापन वक्तव्य सह-संयोजक डॉ. देवेंद्र रोडगे, अजय कुमार बिलारे एवं रामदयाल मकवाना द्वारा दिया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन प्राचार्य डॉ. संगीता बिले ने दिया तथा कार्यक्रम की सफलता पर सभी को बधाई दी। आभार प्रदर्शन डॉ. मनीष परसाई ने किया। कार्यक्रम का संचालन बसंत सिंह राजपूत एवं छात्रा अंकिता गायकवाड़ द्वारा किया गया।

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