मां नर्मदा परिक्रमा के दौरान दिव्य अनुभूति 

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कहते हैं कि आस्था, विश्वास और समर्पण से की गई साधना कभी निष्फल नहीं जाती। ऐसा ही एक भावपूर्ण प्रसंग मां नर्मदा की पावन परिक्रमा के दौरान सामने आया। ग्राम लछौरा से मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले समाजसेवी एवं मां नर्मदा के अनन्य भक्त छोटू पटेल को यात्रा के दौरान एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई, जिसे श्रद्धालु मां की विशेष कृपा के रूप में देख रहे हैं।

परिक्रमा के दौरान साधक को मां नर्मदा ने अपने होने का संकेत अद्वितीय रूप में प्रदान किया। श्रद्धा से भरे इस प्रसंग में उन्हें पूज्य प्रतीक स्वरूप चरण चिन्ह प्राप्त हुए। जिन्हें भक्तजन मां की साक्षात कृपा और आशीर्वाद मान रहे हैं। यह घटना परिक्रमा के समापन से मात्र दो दिन पूर्व घटित हुई, जिससे साधक सहित आसपास के श्रद्धालुओं में गहरी भावनात्मक एवं आध्यात्मिक अनुभूति जागृत हो उठी।

बताया जाता है कि यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही नर्मदा तट स्थित ग्राम बकावां में भगवान शंकर के स्मरण और उनके प्रतीकात्मक दर्शन का भाव प्राप्त हुआ था। वहीं यात्रा के अंतिम पड़ाव में नर्मदा भक्त गौरीशंकर महाराज की कोकसर गांव में नर्मदा कौशल्या नदी के संगम पर मां नर्मदा द्वारा चरण चिन्ह प्रदान किए जाना इस परिक्रमा को पूर्णतः दिव्य बना गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मां की करुणा, वात्सल्य और अपने भक्तों के प्रति असीम प्रेम का प्रमाण है।

ग्राम तजपुरा निवासी योगेश शर्मा के अनुसार मां नर्मदा परिक्रमा को सनातन परंपरा में अत्यंत तपस्वी साधना माना गया है, जिसमें साधक कठिन मार्ग, नियम और संयम का पालन करते हुए केवल श्रद्धा के सहारे यात्रा पूर्ण करता है। ऐसे में इस प्रकार की अनुभूतियां भक्तों के विश्वास को और दृढ़ करती हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इसे मां की अनुकंपा बताते हुए कहा जय हो माई की, तो चिंता काहे की। यह घटना क्षेत्र में आस्था और भक्ति का नया संदेश दे रही है तथा लोगों को धर्म, सेवा और साधना के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कर रही है।

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